गिरिडीह: हवाई सर्वे से बढ़ी हलचल, हेलीपैड और खनिज खोज से जुड़ी बड़ी योजना

गिरिडीह: जिले के आसमान में पिछले दो दिनों से लगातार मंडरा रहे हेलिकॉप्टर ने लोगों के बीच जिज्ञासा के साथ-साथ चिंता भी...

गिरिडीह: जिले के आसमान में पिछले दो दिनों से लगातार मंडरा रहे हेलिकॉप्टर ने लोगों के बीच जिज्ञासा के साथ-साथ चिंता भी बढ़ा दी थी. शनिवार को दिनभर शहर के विभिन्न हिस्सों में कई बार हेलिकॉप्टर को चक्कर लगाते देखा गया, वहीं रविवार सुबह करीब 10 बजे से इसकी गतिविधि फिर तेज हो गई. यह हेलिकॉप्टर गिरिडीह शहर, औद्योगिक क्षेत्रों और आसपास के कई प्रखंडों के ऊपर लगातार उड़ान भरते हुए कई चक्र लगाता रहा.

सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज

हेलिकॉप्टर की लगातार उड़ान को लेकर आम लोगों में उहापोह की स्थिति बन गई. कोई इसे किसी बड़े नेता के आगमन की तैयारी से जोड़ रहा था, तो कुछ लोग इसे बोड़ो हवाई अड्डे के रनवे विस्तार से जोड़कर देख रहे थे. सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर कई तरह की अटकलें और चर्चाएं तेज हो गईं, जिससे भ्रम और भी बढ़ गया.

जांच में सामने आई असली वजह

जब इस पूरे मामले की पड़ताल की गई और जिला प्रशासन से बातचीत हुई, तब असली कारण सामने आया. दरअसल, यह हेलिकॉप्टर जीपीएस-जीएनएसएस आधारित हवाई सर्वेक्षण के लिए उपयोग किया जा रहा है. इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य जिले में ऐसे संभावित स्थानों की पहचान करना है, जहां भविष्य में हेलीपैड का निर्माण किया जा सके.

हेलीपैड निर्माण और आपात उपयोग की तैयारी

यह हेलीपैड आपातकालीन परिस्थितियों जैसे प्राकृतिक आपदा, मेडिकल इमरजेंसी के अलावा बड़े सरकारी कार्यक्रमों, वीआईपी मूवमेंट और महत्वपूर्ण आयोजनों के दौरान उपयोग में लाए जा सकेंगे. प्रशासन का मानना है कि इससे जिले की आपदा प्रबंधन क्षमता और कनेक्टिविटी दोनों मजबूत होंगी.

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अत्याधुनिक तकनीक से हो रहा है सर्वे

इस सर्वे में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है. हेलिकॉप्टर में लगाए गए उपकरणों में जीपीएस-जीएनएसएस रिसीवर, एलआईडीएआर (LiDAR) सिस्टम और हाई-रेजोल्यूशन कैमरे शामिल हैं. इनकी मदद से जमीन का बेहद सटीक सेंटिमीटर स्तर तक डेटा इकट्ठा किया जा रहा है. उड़ान के दौरान जुटाए गए इस डेटा को बाद में जीआईएस (Geographic Information System) सॉफ्टवेयर की सहायता से प्रोसेस कर डिजिटल मैप्स में बदला जाता है.

दुर्गम इलाकों में भी सटीक जानकारी संभव

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उन दुर्गम और कठिन इलाकों की भी सटीक जानकारी दे सकती है, जहां इंसानों का पहुंचना मुश्किल होता है. इससे योजनाओं को जमीन पर उतारने में समय और संसाधनों की बचत होती है.

तिसरी में भी जारी है अलग तरह का सर्वे

इधर गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड में भी सर्वे का काम चल रहा है, लेकिन इसका उद्देश्य अलग है. यहां भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की टीम लीथियम खनिज की संभावनाओं की तलाश में जुटी हुई है.

लीथियम भंडार की तलाश में जीएसआई की टीम

दरअसल, तिसरी-गावां क्षेत्र की अभ्रक पट्टी को खनिज संपदा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. प्रारंभिक संकेतों के अनुसार यहां लीथियम के भंडार होने की संभावना जताई गई है. इसी को लेकर जीएसआई के विशेषज्ञों की टीम शनिवार को तिसरी पहुंची और सर्वे कार्य शुरू किया.

आर्थिक विकास की बड़ी उम्मीद

अगर इस क्षेत्र में लीथियम के पर्याप्त भंडार की पुष्टि होती है, तो यह गिरिडीह ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के लिए आर्थिक दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है. लीथियम का उपयोग बैटरी निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहनों और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में बड़े पैमाने पर होता है, जिससे इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.

विकास और संसाधन खोज की दिशा में बड़ा कदम

कुल मिलाकर, आसमान में हेलिकॉप्टर की हलचल ने भले ही शुरुआत में लोगों को असमंजस में डाल दिया हो, लेकिन अब साफ हो गया है कि यह गतिविधि पूरी तरह विकास और वैज्ञानिक सर्वेक्षण से जुड़ी है. एक ओर जहां हेलीपैड निर्माण के लिए स्थानों की पहचान की जा रही है, वहीं दूसरी ओर खनिज संपदा की खोज के जरिए क्षेत्र के आर्थिक विकास की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं.

आने वाले समय में दिखेगा असर

आने वाले समय में इन दोनों सर्वे के परिणाम गिरिडीह जिले के बुनियादी ढांचे, आपदा प्रबंधन और औद्योगिक विकास को नई दिशा दे सकते हैं.

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