गिरिडीह: जिले के करहरबारी एवं जीतपुर पंचायत में जंगली हाथियों द्वारा फसल और संपत्ति को हुए नुकसान के बाद प्रभावित ग्रामीणों को राहत देते हुए वन विभाग ने मुआवजा राशि का वितरण किया. यह कार्यक्रम गिरिडीह पूर्वी वन प्रमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर वन क्षेत्र पदाधिकारी, गिरिडीह के नेतृत्व में आयोजित किया गया.

बताया गया कि हाल के दिनों में इन पंचायतों में हाथियों की आवाजाही बढ़ने से कई किसानों की फसलें बर्बाद हुईं, वहीं कुछ ग्रामीणों की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा. इन घटनाओं को देखते हुए विभाग द्वारा त्वरित सर्वेक्षण कर क्षति का आकलन किया गया और पात्र ग्रामीणों को मुआवजा देने की प्रक्रिया पूरी की गई.
मुआवजा वितरण के दौरान वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर उन्हें वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक किया. अधिकारियों ने ग्रामीणों को सलाह दी कि हाथियों के झुंड के नजदीक जाने से बचें, रात के समय सतर्क रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचित करें. साथ ही सामुदायिक स्तर पर मिलकर सतर्कता बरतने और सुरक्षित तरीकों से हाथियों को आबादी से दूर रखने के उपाय भी बताए गए.
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसके लिए लगातार निगरानी, जागरूकता अभियान और त्वरित राहत वितरण जैसे कदम उठाए जा रहे हैं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी किसी प्रकार की क्षति होने पर प्रभावित परिवारों को शीघ्र सहायता उपलब्ध कराई जाएगी.
ग्रामीणों ने समय पर मुआवजा मिलने पर संतोष व्यक्त किया और वन विभाग के प्रयासों की सराहना की. उनका कहना था कि इससे उन्हें आर्थिक राहत मिली है और विभाग की सक्रियता से उनका विश्वास बढ़ा है.
जीतपुर पंचायत में आयोजित कार्यक्रम में मुखिया बीरबल मंडल, प्रभारी वनपाल रोहित कुमार और उप परिसर पदाधिकारी सिकंदर पास मौजूद रहे. वहीं करहरबारी पंचायत में मुखिया सहारा खातून और प्रभारी वनपाल रोहित कुमार द्वारा पीड़ित ग्रामीणों के बीच मुआवजा राशि का वितरण किया गया. कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे.
