Plea for anticipatory bail: बुधवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट रुख किया है. उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी पर आरोप लगाने के बाद असम में उनके खिलाफ दर्ज मामले में अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. पवन खेड़ा ने हैदराबाद स्थित अपना पता बताया और कोर्ट से अनुरोध किया कि गिरफ्तारी की स्थिति में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाए. याचिका 7 अप्रैल को दायर की गई थी. खेड़ा ने याचिका में गुवाहाटी अपराध शाखा के डीसीपी और तेलंगाना सरकार को प्रतिवादी बनाया है.
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“असम के मुख्यमंत्री ने मेरे पीछे पुलिस भेजी”
पवन खेड़ा ने कहा, असम के मुख्यमंत्री ने मेरे पीछे पुलिस भेजी. पत्नी के पासपोर्ट और विदेशी संपत्तियों के बारे में सवालों का जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा, असम के मुख्यमंत्री की पत्नी की व्योमिंग (अमेरिकी राज्य) में पंजीकृत कंपनी के लंदन, दुबई और ढाका में पते दर्ज हैं.
पवन खेड़ा पर जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप
असम पुलिस का आरोप है कि खेड़ा ने मुख्यमंत्री के परिवार की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया. जांच में दिल्ली स्थित खेड़ा के आवास से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं, जिनमें मामले से जुड़ी सामग्री होने का दावा किया गया है. यह विवाद तब शुरू हुआ, जब पांच अप्रैल को पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की. उन्होंने आरोप लगाया था कि असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई पासपोर्ट और विदेशी संपत्ति है, जिसका जिक्र मुख्यमंत्री के चुनाव शपथ पत्र में नहीं किया गया था.
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हिमंता ने आरोप को किया था खारिज
हालांकि, उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया गया. मुख्यमंत्री सरमा ने आरोपों को जाली दस्तावेजों पर आधारित बताया. उन्होंने कहा, ये आरोप चुनाव से पहले भ्रम फैलाने के मकसद से लगाए गए हैं. उन्होंने मीडिया को बताया कि असम पुलिस दस्तावेजों के स्रोत का पता लगाने के लिए कड़ी मेहनत करेगी. पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) देवजीत नाथ की अगुवाई में अपराध शाखा ने दिल्ली में खेड़ा के आवास पर छापेमारी की. खेड़ा वहां मौजूद नहीं थे. लेकिन जांचकर्ताओं ने डिजिटल साक्ष्य एकत्र किए.
पुलिस की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित : कांग्रेस
इसके बाद कांग्रेस ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की और इसे राजनीति से प्रेरित बताया. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि कानून का इस्तेमाल विपक्ष की आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ईडी और सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है.
