खाटू श्याम बाबा की आरती, भक्ति से मिलता है मन को सुकून

News Desk: महाभारत के वीर योद्धा बर्बरीक को कलयुग में खाटू श्याम बाबा के रूप में पूजा जाता है। उनकी आरती का...

khatu shyam
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News Desk: महाभारत के वीर योद्धा बर्बरीक को कलयुग में खाटू श्याम बाबा के रूप में पूजा जाता है। उनकी आरती का गायन करने से मन को गहरी शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। बाबा श्याम की आरती उनके दिव्य स्वरूप, कृपा और भक्तों पर बरसने वाली उनकी अनंत दया का गुणगान करती है।

जब मंदिर के द्वार खुलते हैं और “ॐ जय श्री श्याम हरे” की ध्वनि गूंजती है, तब पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से भर उठता है। चाहे सुबह की मंगल आरती हो या रात की शयन आरती, बाबा के चरणों में सिर झुकाने से भक्तों की परेशानियां दूर होने लगती हैं। आइए जानते हैं बाबा श्याम की आरती, उसका अर्थ और पूजा करने की सही विधि।

1. खाटू श्याम आरती का महत्व

खाटू श्याम जी की प्रसिद्ध आरती “ॐ जय श्री श्याम हरे” केवल एक भक्ति गीत नहीं है, बल्कि इसमें उनके जीवन, त्याग और दिव्य शक्तियों का वर्णन मिलता है। इस आरती का संदेश यह है कि जब मनुष्य जीवन की कठिनाइयों से हार जाता है, तब बाबा श्याम उसे सहारा देते हैं। आरती गाने का अर्थ है अपने अहंकार को छोड़कर पूरी श्रद्धा के साथ स्वयं को उनके चरणों में समर्पित करना।

2. खाटू श्याम आरती करने की विधि

पूजा सामग्री

आरती करने के लिए एक थाली में कुछ आवश्यक सामग्री रखें, जैसे

घी या तिल के तेल का दीपक

कपूर (आरती के अंत में जलाने के लिए)

ताजे फूल, विशेष रूप से गुलाब

इत्र, जो बाबा को अत्यंत प्रिय माना जाता है

भोग के लिए मावे का पेड़ा, खीर या चूरमा

आरती का समय

बाबा श्याम की आरती करने का सबसे अच्छा समय सुबह का मंगल आरती और शाम की शयन आरती माना जाता है। घर में भी आप सुबह और शाम दीपक जलाकर यह आरती कर सकते हैं।

स्वच्छता का ध्यान

आरती से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। यदि संभव हो तो केसरिया या पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है क्योंकि यह बाबा का प्रिय रंग है।

खाटू श्याम आरती करने का तरीका

1. ध्यान और आह्वान
सबसे पहले बाबा श्याम की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर उनका ध्यान करें।

2. आरती की थाली घुमाना
आरती की थाली को हमेशा घड़ी की दिशा में घुमाना चाहिए।

चरणों के पास 4 बार

नाभि के पास 2 बार

चेहरे के सामने 1 बार

पूरे शरीर के चारों ओर 7 बार

3. भक्ति भाव
आरती गाते समय ताल और लय का ध्यान रखें। चाहें तो ताली बजाएं या छोटी घंटी का प्रयोग करें। मन में यह भाव रखें कि बाबा स्वयं आपके सामने विराजमान हैं।

4. पुष्प अर्पित करें
आरती समाप्त होने के बाद बाबा को फूल अर्पित करें और अपनी मनोकामना व्यक्त करें।

5. जयकारा लगाएं
आरती के दौरान “हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा” का जयकारा जरूर लगाएं।

6. एकाग्रता बनाए रखें
आरती करते समय इधर-उधर की बातें न करें और पूरी श्रद्धा से पूजा करें।

7. प्रसाद वितरण
पहले प्रसाद बाबा को अर्पित करें, उसके बाद घर के सभी लोगों में बांटें और अंत में स्वयं ग्रहण करें।

छोटा सुझाव:
आरती के अंत में भगवान से क्षमा प्रार्थना जरूर करें कि यदि पूजा में कोई गलती हुई हो तो वे उसे क्षमा करें।

3. खाटू श्याम आरती (Lyrics)

ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥

रतन जड़ित सिंहासन, सिर पर चंवर ढुरे।
तन केसरिया बागो, कुंडल श्रवण पड़े।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥

गल पुष्पों की माला, सिर पार मुकुट धरे।
खेवत धूप अग्नि पर दीपक ज्योति जले।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥

मोदक खीर चूरमा, सुवर्ण थाल भरे।
सेवक भोग लगावत, सेवा नित्य करे।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥

झांझ कटोरा और घड़ियावल, शंख मृदंग बजे।
भक्त आरती गाते, जय-जयकार करें।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥

जो भी ध्यावे फल पावे, सब दुख दूर टरे।
सेवक जन निज मुख से, श्री श्याम-श्याम उचरे।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥

श्री श्याम बिहारी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहते भक्तजन, मनवांछित फल पावे।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥

जय श्री श्याम हरे, बाबा जी श्री श्याम हरे।
निज भक्तों के तुमने, पूर्ण काज करे।
ॐ जय श्री श्याम हरे॥

4. खाटू श्याम आरती के लाभ

कहा जाता है — “जो ध्यावे फल पावे, सब दुःख दूर टरे।”
अर्थात जो भक्त सच्चे मन से बाबा श्याम का ध्यान करता है और उनकी आरती गाता है, उसके जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं और उसे मनचाहा फल प्राप्त होता है।

बाबा श्याम को “हारे का सहारा” कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि जब इंसान हर जगह से निराश हो जाता है, तब बाबा की शरण में जाकर उसे आशा और सहारा मिलता है।

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