हजारीबाग-बोकारो के बाद अब रामगढ़ पुलिस विभाग में वाहन घोटाले की चर्चा, बाइक को बस बताकर डकारे करोड़ों रुपये

रामगढ़: झारखंड के हजारीबाग और बोकारो जिले के पुलिस विभाग में वित्तीय अनियमितताओं के खुलासे के बाद अब रामगढ़ जिले में भी...

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रामगढ़: झारखंड के हजारीबाग और बोकारो जिले के पुलिस विभाग में वित्तीय अनियमितताओं के खुलासे के बाद अब रामगढ़ जिले में भी हड़कंप मच गया है. वर्ष 2019 और 2020 के विधानसभा व पंचायत चुनावों के दौरान हुए 1.86 करोड़ रुपये के कथित वाहन घोटाले की फाइलें एक बार फिर खुलने की तैयारी में हैं. अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे मामले की नए सिरे से जांच शुरू की जा रही है.

चारा घोटाले की तर्ज पर बड़ा खेला

रामगढ़ पुलिस विभाग में हुआ यह घोटाला बिहार के चर्चित चारा घोटाले की याद दिलाता है. जिस तरह चारा घोटाले में स्कूटरों पर टन के हिसाब से चारा ढोना दिखाया गया था, ठीक उसी तर्ज पर रामगढ़ में कागजों पर बाइक, ऑटो और छोटे चारपहिया वाहनों को बड़ी बस बना दिया गया. इन छोटे वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर को दस्तावेजों में बस के रूप में दर्ज किया गया. पाकुड़, साहेबगंज और अन्य जिलों में जवानों को लाने-ले जाने के नाम पर भारी-भरकम बस किराया, ईंधन का खर्च और चालकों का भत्ता निकालकर डकार लिया गया.

प्रारंभिक जांच में पाया गया कि 19 अलग-अलग वाहन मालिकों के फर्जी हस्ताक्षर कर भुगतान की राशि को केवल एक ही व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर कर दिया गया. जब यह मामला पहली बार प्रकाश में आया, तब तत्कालीन एसपी ने शुरुआती कार्रवाई करते हुए कुछ कदम उठाए थे, लेकिन बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया.

रामगढ़ थाने में केस तो दर्ज हुआ, लेकिन जांच की गति धीमी रही

एमटी शाखा (मोटर ट्रांसपोर्ट) के मुंशी मनीष सिंह को चाईबासा और जेपी शाखा के मुंशी रामप्रवेश सिंह को देवघर स्थानांतरित कर दिया गया. रामगढ़ थाने में केस तो दर्ज हुआ, लेकिन जांच की गति धीमी रही.मामले के आईओ एसआई श्रीनिवास सिंह सेवानिवृत्त हो गए और तत्कालीन सार्जेंट मेजर मंशु गोप का जिले से तबादला हो गया, जिसके बाद फाइल दबा दी गई.

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