News Desk : Ramadan में हर दिन इबादत और रहमत का माना जाता है, लेकिन शुक्रवार यानी जुमा का दिन खास अहमियत रखता है. रमजान के आखिरी शुक्रवार को अलविदा जुमा या जुमातुल विदा कहा जाता है. इस दिन देशभर की मस्जिदों में विशेष नमाज अदा की जाती है और बड़ी संख्या में रोजेदार अल्लाह की इबादत के लिए पहुंचते हैं. इस साल धार्मिक विद्वानों के अनुसार रमजान के 23वें रोजे यानी 13 मार्च 2026 को अलविदा जुमा मनाए जाने की संभावना है. हालांकि चांद दिखने की स्थिति के आधार पर इसमें बदलाव भी हो सकता है.

13 मार्च या 20 मार्च, क्यों है कन्फ्यूजन
इस्लामिक कैलेंडर चांद पर आधारित होता है, इसलिए रमजान 29 या 30 दिनों का हो सकता है. यदि 19 मार्च को शव्वाल का चांद दिखाई देता है तो रमजान 29 दिनों का माना जाएगा और 13 मार्च को ही आखिरी जुमा होगा. वहीं अगर 19 मार्च को चांद नजर नहीं आता है तो रमजान 30 दिनों का होगा. ऐसी स्थिति में 20 मार्च को रमजान का अंतिम शुक्रवार होगा और उसी दिन जुमातुल विदा की नमाज अदा की जाएगी. इसी वजह से अभी अलविदा जुमा की तारीख को लेकर थोड़ी असमंजस की स्थिति बनी हुई है.
अलविदा जुमा का धार्मिक महत्व
रमजान के आखिरी शुक्रवार को इस्लाम में बेहद फजीलत वाला दिन माना जाता है. यह दिन रमजान की विदाई का प्रतीक भी होता है. इस मौके पर लोग नमाज अदा करने के साथ ज्यादा से ज्यादा दुआ करते हैं और जरूरतमंदों को जकात और सदका भी देते हैं. माना जाता है कि रमजान में किए गए नेक कामों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है. इसलिए अलविदा जुमा रोजेदारों को यह संदेश देता है कि पूरे महीने की तरह आगे भी नेक रास्ते और इबादत को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाए रखें.

