Ranchi: चबुआ विधानसभा क्षेत्र चाय बागानों में मंगलवार को कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला, जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा की फायरब्रांड नेता कल्पना सोरेन ने न केवल चुनावी बिसात बिछाई, बल्कि चाय की पत्तियों को चुनती उंगलियों और थके हुए कंधों में उम्मीद की नई ऊर्जा भर दी. जेएमएम प्रत्याशी भूबेन मुरारी के पक्ष में प्रचार करने पहुंची कल्पना सोरेन ने खुद को स्टार प्रचारक के बजाय एक सहयोगी के रूप में पेश किया, जो बागान श्रमिकों की दुश्वारियों को अपनी आँखों से देखने और समझने के लिए उनके बीच जा बैठीं.
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चाय बागानों में अपनापन और अधिकारों की हुंकार
कल्पना सोरेन ने प्रचार के दौरान किसी ऊंचे मंच को चुनने के बजाय सीधे चाय बागानों का रुख किया. वहां कार्यरत महिला श्रमिकों और मेहनतकश भाइयों से मिलते हुए उन्होंने उनके जीवन की जमीनी हकीकत को करीब से जाना. उन्होंने पत्तियों की टोकरी थामे श्रमिकों से उनकी समस्याओं, वेतन और बुनियादी सुविधाओं पर लंबी चर्चा की.
आपके हक की लड़ाई को धार देने आए हैं : कल्पना सोरेन
कल्पना सोरेन ने कहा कि आपका पसीना इस धरती को सींचता है और आपका संघर्ष ही हमारी असली पहचान है. हम यहां सिर्फ वोट माँगने नहीं, बल्कि आपके हक की लड़ाई को धार देने आए हैं. आपकी जीवन परिस्थितियाँ बदलने का वक्त आ गया है. आपके सम्मान और सुरक्षित भविष्य के लिए हम दीवार बनकर आपके साथ खड़े हैं. आपका अधिकार दिलाना हमारी राजनीतिक मजबूरी नहीं, बल्कि नैतिक ज़िम्मेदारी है.
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चुनावी समीकरण और श्रमिक फैक्टर
चबुआ में चाय बागान श्रमिकों की संख्या निर्णायक भूमिका में रहती है. कल्पना सोरेन का यह ‘कनेक्ट’ न केवल जेएमएम प्रत्याशी भूबेन मुरारी के पक्ष में माहौल बना रहा है, बल्कि विपक्ष के लिए भी कड़ी चुनौती पेश कर रहा है. स्थानीय लोगों में कल्पना सोरेन की सादगी और सीधे संवाद की शैली को लेकर काफी उत्साह देखा गया.
