पलामू: लोकप्रिय कला गुरु एस. एम. नैयर जमाल के निधन पर इप्टा, प्रगतिशील लेखक संघ, अंशु आर्ट, कशिश आर्ट तथा रंग संग आर्ट गैलरी के संयुक्त तत्वावधान में कशिश आर्ट परिसर में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. सभा की अध्यक्षता इप्टा के अध्यक्ष प्रेम भसीन ने की, जबकि संचालन प्रेम प्रकाश ने किया. कार्यक्रम की शुरुआत नैयर जमाल की तस्वीर पर प्रेम भसीन, पंकज श्रीवास्तव, शीला श्रीवास्तव, शालिनी श्रीवास्तव, आशा शर्मा एवं अमन चक्र द्वारा संयुक्त रूप से माल्यार्पण कर की गई. इसके बाद उपस्थित सभी कलाकारों ने पुष्पांजलि अर्पित की.
कलाकारों ने नैयर जमाल के सरल स्वभाव और मानवीय गुणों को किया याद
संचालन करते हुए प्रेम प्रकाश ने कहा कि आज हम ऐसे व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हुए हैं, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन कला के प्रति समर्पित कर दिया. वे चित्रकला की विभिन्न शैलियों के उस्ताद थे. उनकी कृतियों में समाज की कुरीतियां, बदहाली, मजदूरों और किसानों का दर्द स्पष्ट रूप से झलकता था. साथ ही उन्होंने पलामू की प्राकृतिक सुंदरता को भी अपनी कला का विषय बनाया. उन्होंने हजारों कलाकारों को प्रशिक्षित किया, जिनमें कई ऐसे छात्र भी थे, जिनसे उन्होंने कोई शुल्क नहीं लिया. वे धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर हर पर्व-त्योहार पर अपनी कला के माध्यम से समाज को संदेश देते थे.
उनके शिष्य विलियम ने भावुक होकर कहा कि नैयर साहब उनके लिए माता-पिता समान थे. एक प्रसंग को याद करते हुए उन्होंने बताया कि जब वे जन्मदिन पर उपहार लेकर गए, तो नैयर साहब ने डांटते हुए पूछा कि क्या उन्होंने अपने पिता को कभी उपहार दिया है और उपहार लौटा दिया. यह कहते-कहते विलियम भावुक हो उठे.
संजीत प्रजापति ने भी नैयर साहब के साथ अपने संबंधों को याद करते हुए भावुकता व्यक्त की. वरिष्ठ पत्रकार प्रभात मिश्रा सुमन ने कहा कि नैयर साहब कम बोलते थे, लेकिन उनकी रेखाएं एक पूरी कहानी कह देती थीं. वे अपने रंग और ब्रश के माध्यम से हर अवसर पर समाज को शुभकामनाएं देते थे.
पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि नैयर साहब केवल चित्रकार ही नहीं, बल्कि साहित्य के भी गहरे जानकार थे. उनकी माता एक उत्कृष्ट शायरा थीं. उनकी कृतियां आज भी कलाकारों को दिशा देती रहेंगी.
सभा की अध्यक्षता करते हुए प्रेम भसीन ने कहा कि पिछले एक महीने में कई प्रियजनों को श्रद्धांजलि देनी पड़ी है, जो अत्यंत दुखद है. उन्होंने बताया कि नैयर जमाल का जन्म 1949 में हुआ था और उन्होंने पलामू जैसे छोटे क्षेत्र में रहकर चित्रकला को ऊंचाइयों तक पहुंचाया.
अमन चक्र, आशा शर्मा, शीला श्रीवास्तव और ज्योति ने भी उनके सरल स्वभाव और मानवीय गुणों को याद किया. रवि शंकर ने शोक प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में सभी कलाकार उनके परिवार के साथ हैं. उन्होंने नैयर साहब को समर्पित एक भव्य आर्ट गैलरी स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा, जिसे सभी ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया.
अंत में सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस अवसर पर वैजयंती गुप्ता, वीणा राज, अहिल्या गिरी, अजीत कुमार, संजीव कुमार संजू, शशि पांडे सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे.
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