गिरिडीह: प्रकृति और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक बाहा पर्व की मारांग बुरु पारसनाथ में धूम देखने को मिल रही है. संताल आदिवासी संस्कृति के इस महत्वपूर्ण पर्व के अवसर पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना और कई धार्मिक अनुष्ठान शुक्रवार को किये गए. इस दौरान मुख्य रूप से संस्कृति, कला एवं पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार, मंत्री फागू बेसरा एवं घाटशिला विधायक सोमेश सोरेन भी शामिल हुए.

बता दें मौजूद सभी अतिथियों का सर्वप्रथम आदिवासी रीतियों एवं परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया, जिसके पश्चात सभी ने मरांग बुरु में पूजा अर्चन कर सभी के कल्याण की प्रार्थना की. इसके पश्चात सभी को अंगवस्त्र एवं स्मृतिचिन्ह भेंट कर उनका मंच पर स्वागत किया गया.
इस स्थल का करेंगे विकास: सुदिव्य कुमार
समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा, कि उनकी इस स्थल में काफी आस्था है. विधायक से मंत्री बनने तक के सफर में यहां से उन्हें आशीर्वाद प्राप्त हुआ है. वह पर्यटन मंत्री होने के नाते इस स्थल का और भी विकास करेंगे. वहीं, JMM के केंद्रीय महा सचिव फागू बेसरा ने कहा कि बाहा पर्व को हेमंत सोरेन की सरकार ने दो वर्षों से राजकीय उत्सव के रूप में लिया है, जिसके कारण हम इसे सरकार की तरफ से सरकारी कार्यक्रम की तरह मना रहे हैं. उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार आदिवासी संथाल समाज के धार्मिक स्थल और उनके रूढ़िवादी व्यवस्था को अक्षुण्ण बनाने के लिए संकल्पित है.
बाहा बोंगा समिति के सदस्य सिकंदर हेंब्रम ने कहा कि पारसनाथ स्थित मरांग बुरु आदिवासी समाज के लोगों का सर्वोच्च धार्मिक स्थल है और पूरे विश्व में सबसे पहले बाहा बोंगा की पूजा यहीं होती है. उन्होंने कहा कि यह पर्व प्रकृति पूजा का पर्व है और समाज के लोग इसे धूम धाम के साथ मना रहे हैं.

