NEWS DESK: बुढ़ापे की लाठी माने जाने वाले नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. पेंशन रेगुलेटर PFRDA ने NPS Swasthya के दूसरे चरण का पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है. इस पहल का उद्देश्य रिटायरमेंट सेविंग के साथ हेल्थकेयर जरूरतों को जोड़ना है. अब NPS सब्सक्राइबर मेडिकल इमरजेंसी में अपनी जमा राशि का कुछ हिस्सा निकाल सकेंगे, जिससे उन्हें सेविंग और सेहत दोनों में सुरक्षा मिलेगी.
मेडिकल खर्च बढ़ने पर 25% तक निकासी की सुविधा
भारत में तेजी से बढ़ते इलाज के खर्च को देखते हुए यह कदम उठाया गया है. अनुमान है कि साल 2026 तक मेडिकल खर्च करीब 14 प्रतिशत तक बढ़ सकता है. पहले NPS का पैसा रिटायरमेंट तक लॉक रहता था, लेकिन अब NPS Swasthya के तहत सब्सक्राइबर अपने कुल योगदान का 25 प्रतिशत हिस्सा मेडिकल जरूरतों के लिए निकाल सकते हैं. इस राशि को नेट एलिजिबल बैलेंस कहा जाएगा, जिसे डिजिटल तरीके से आसानी से एक्सेस किया जा सकेगा.
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पूरी प्रक्रिया डिजिटल, ऐप से होगा सारा काम
इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पेपरलेस बनाया गया है. सब्सक्राइबर MAven ऐप के जरिए फंड निकालने की रिक्वेस्ट कर सकेंगे. इस योजना में कई बड़ी कंपनियां शामिल हैं. मेडी असिस्ट तकनीक और क्लेम से जुड़ा काम संभालेगी. CAMS KRA KYC और ऑनबोर्डिंग को आसान बनाएगा. टाटा पेंशन फंड और एक्सिस पेंशन फंड निवेश को मैनेज करेंगे. वहीं जरूरत पड़ने पर आदित्य बिरला हेल्थ इंश्योरेंस टॉप-अप इंश्योरेंस कवर भी देगा.
करोड़ों सब्सक्राइबर्स को फायदा, लेकिन सावधानी जरूरी
PFRDA के अनुसार, 29 मार्च 2026 तक NPS और अटल पेंशन योजना के कुल सब्सक्राइबर्स 9.64 करोड़ हो चुके हैं और कुल एसेट 16.55 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. इस नई सुविधा से करोड़ों लोगों को फायदा होगा. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पैसा निकालते समय सोच-समझकर फैसला लें, क्योंकि इससे रिटायरमेंट के समय मिलने वाली कुल राशि पर असर पड़ सकता है.
