रांची: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर जेटेट नियमावली की गहन समीक्षा करने की मांग की है. उन्होंने पत्र में कहा है कि सभी जिलों की अपेक्षित भाषाओं को शामिल करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाएं. स्वाभाविक रूप से विकसित और प्रचलित बोली-भाषाओं के साथ राज्य सरकार द्वारा दोहरा मापदंड अपनाना राज्य की प्रगति में बाधक साबित हो सकता है.

10 साल से जेटेट परीक्षा नहीं हुई
पत्र में कहा गया है कि विगत 10 वर्षों से राज्य में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए जेटेट परीक्षा आयोजित नहीं हुई है. उच्च न्यायालय ने इसे 31 मार्च 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं. इसके आलोक में झारखंड सरकार का शिक्षा विभाग नई नियमावली बनाने की प्रक्रिया में जुटा है. हालांकि, विभिन्न जिलों के लिए जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं का जो निर्धारण किया जा रहा है, वह युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर सकता है.
भोजपुरी, मगही, कुरमाली, अंगिका, मैथिली को भी मिले स्थान
पत्र में यह भी कहा गया है कि राज्य सरकार झारखंड के उड़ीसा और पश्चिम बंगाल से सटे सीमावर्ती जिलों में उड़िया और बंगला को क्षेत्रीय भाषा के रूप में मान्यता दे रही है. ऐसे में बिहार से सटे जिलों—पलामू, गढ़वा, लातेहार तथा संथाल परगना के देवघर, गोड्डा और साहेबगंज—जहां बड़ी संख्या में भोजपुरी, मगही, कुरमाली, अंगिका और मैथिली भाषाएं बोली जाती हैं, उन्हें भी नियमावली में स्थान मिलना चाहिए.
आदित्य साहू ने कहा कि राज्य की जमीनी हकीकत को स्वीकार करते हुए विकास के मार्ग को प्रशस्त करना और अवसरों का विस्तार करना ही राजधर्म है, जो राज्य की आवश्यकता भी है.

