रांची: झारखंड में पर्यटन पर भी महंगाई की मार पड़ गई है. शहरी नगर निकाय क्षेत्र अंतर्गत स्थित होटल में ठहरने वाले पर्यटकों से अब टूरिज्म टैक्स वसूला जाएगा, क्योंकि झारखंड सरकार ने नगर निकायों की कमाई बढ़ाने के लिए झारखंड नगरीय पर्यटक कर नियमावली लागू कर दिया है. इस नए नियम के तहत अब राज्य के शहरी क्षेत्रों (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत) के होटलों में रुकना थोड़ा महंगा हो जाएगा. इन क्षेत्रों में स्थित छोटे से लेकर बड़े होटल में ठहरने वाले पर्यटकों से अलग-अलग स्लैब में टैक्स वसूले जाएंगे. 18% जीएसटी देने वाले होटल में ठहरने वाले भारतीय पर्यटकों से 5% और विदेशी पर्यटकों से 10% टूरिज्म टैक्स लिया जाएगा. होटल की कैटेगरी के अनुसार टैक्स का निर्धारण किया गया है. पर्यटकों से वसूली गई टैक्स की राशि प्रत्येक तिमाही समाप्त होने के बाद नगर निगम में जमा की जाएगी. निगम द्वारा पर्यटन कर से मिलने वाली राशि से शहरी क्षेत्र में पर्यटन स्थलों का विकास किया जाएगा.
पर्यटकों को ऐसे देने होंगे टैक्स
पर्यटकों को उनकी श्रेणी और होटल की श्रेणी के हिसाब से टैक्स का भुगतान करना होगा. टैक्स की दरें होटल के जीएसटी स्लैब के आधार पर तय की गई हैं. यानी होटल जितना बड़ा और लग्जरी होगा, पर्यटक कर भी उतना ही अधिक होगा. नियमावली में होटल को तीन श्रेणी में बांटा गया है, पहले बिना जीएसटी वाले होटल दूसरा 18% से कम जीएसटी देने वाले होटल और तीसरा 18% से अधिक जीएसटी देने वाले होटल. तीनों कैटेगरी के होटल में और विदेशी पर्यटकों के लिए बिना जीएसटी वाले होटल.
सरल शब्दों में समझिए टूरिज्म टैक्स क्यों, और कैसे?
– क्यों – सरकार का लक्ष्य इस टैक्स से मिलने वाली राशि का उपयोग पर्यटन सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने में करना है.
– कैसे- नगर निगम या संबंधित शहरी स्थानीय निकाय सीधे पर्यटकों से यह पैसा नहीं लेंगे, बल्कि इसकी जिम्मेदारी होटल मालिकों को सौंपी गई है.
– बिल में जुड़ेगा चार्ज: होटल मालिक कमरे के शुल्क और अन्य सेवाओं (भोजन, जिम आदि) के कुल बिल पर यह कर लगाएंगे.
– पेमेंट – होटल मालिकों को हर तीन महीने (तिमाही) के खत्म होने के 15 दिनों के भीतर एकत्रित टैक्स सरकारी पोर्टल के माध्यम से नगरपालिका के खाते में जमा करना होगा.
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