रांची: झारखंड में नशीले पदार्थों की आमद और तस्करी को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. पड़ोसी राज्य ओडिशा अब गांजा तस्करी के मुख्य हब के रूप में उभर कर सामने आया है. झारखंड रेल पुलिस की हालिया तफ्तीश में यह बात सामने आई है, कि ओडिशा के कंधमाल जिले का रहने वाला वरुण दिग्गल उर्फ टाइगर इस पूरे अवैध कारोबार का मास्टरमाइंड है. डीजी अनिल पालटा के निर्देश पर गठित टीम अब इस टाइगर के नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है.
सीडीआर से खुले राज, टाइगर का फैला है जाल:
पुलिस जांच के अनुसार, झारखंड और बिहार में पकड़ी गई गांजे की बड़ी खेपों का सीधा संबंध वरुण दिग्गल से पाया गया है. कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) के विश्लेषण से यह पुष्टि हुई है कि वह तस्करी के इस संगठित गिरोह का संचालन कर रहा है. इस तस्करी सिंडिकेट में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं और किन्नर भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. पुलिस अब उन सभी चेहरों की पहचान कर रही है जो वरुण के साथ संपर्क में थे, ताकि पूरे सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ा जा सके.
तस्करी का रूट: ओडिशा के खेतों से दिल्ली की गलियों तक:
गांजा तस्करी का यह नेटवर्क बेहद सुव्यवस्थित तरीके से काम कर रहा है.ओडिशा के मलकानगिरी, कोरापुट और चित्रकोंडा जैसे सुदूर इलाकों में तस्कर खेत किराए पर लेकर बड़े पैमाने पर गांजा उगाते हैं. कटाई के बाद गांजे को छोटे ट्रकों और पिकअप वैन के जरिए स्थानीय हब तक पहुंचाया जाता है. सिमडेगा और जमशेदपुर इस तस्करी का मुख्य ट्रांजिट पॉइंट बना हुआ है. यहां से ट्रेनों और कंटेनर ट्रकों के माध्यम से गांजा बिहार, नोएडा और दिल्ली जैसे शहरों में भेजा जाता है. इस क्षेत्र के गांजे की गुणवत्ता अधिक होने के कारण उत्तर भारत के बाजारों में इसकी भारी डिमांड है.
