रांची: झारखंड विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के 13वें दिन नीरा यादव और प्रदीप यादव आमने-सामने हो गए. नीरा यादव ने कहा कि सत्ता पक्ष अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है. कांग्रेस अराजकता फैलाने में लगी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस राष्ट्रपति का अपमान करने में लगी है. हाथ में संविधान लेकर संविधान के खिलाफ बोलते हैं. हमारे मां-बाप ने कोदो खिलाकर नहीं पढ़ाया है, हम भी ज्ञान रखते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि एलपीजी की कालाबाजारी को बढ़ावा दिया जा रहा है.

इस पर राज सिन्हा ने कहा कि सत्ता पक्ष ने पेट्रोल सब्सिडी योजना बंद कर दी है. इस पर प्रदीप यादव ने कहा कि भाजपा आदिवासी विरोधी है. उन्होंने कहा कि मंदिरों में भोग बंद हो गया है.
नीरा यादव ने कहा कि बच्चे कुपोषण के शिकार हो रहे हैं. कामकाजी महिलाओं के लिए छात्रावास नहीं है. बच्चों को बासी मिड-डे मील दिया जा रहा है. सात जिलों में पिछड़ों का आरक्षण शून्य है. उन्होंने कहा कि एसटी, एससी और ओबीसी का प्रमाण पत्र सरकारी और मान्यता प्राप्त स्कूलों में कैंप लगाकर बनाया जाना चाहिए. वृद्ध और दिव्यांगों को 2500 रुपये पेंशन मिलनी चाहिए.
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इस बजट में खो गए हैं असली अबुआ: पूर्णिमा साहू
पूर्णिमा साहू ने कहा कि इस बजट में असली अबुआ खो गए हैं. यह केवल आंकड़ों की बाजीगरी है. सत्ता पक्ष को कॉपी-पेस्ट की राजनीति छोड़नी चाहिए. उन्होंने कहा कि इस बजट को केंद्र सरकार के खिलाफ शिकायत पत्र बना दिया गया है. दिल्ली को दोष देना आसान हो जाता है. केंद्र ने धन और योजनाएं दी हैं, लेकिन उन्हें धरातल पर उतारने का काम राज्य सरकार का है.
उन्होंने कहा कि बजट दस्तावेज में आरोप तो हैं, लेकिन परिणाम नहीं दिखते. जनता आरोपों की राजनीति नहीं चाहती, बल्कि समाधान चाहती है. एटीआर की रिपोर्ट के मुताबिक 68 योजनाओं में से सिर्फ आठ ही पूरी हो पाई हैं. उन्होंने कहा कि महिला आयोग जैसी संस्थाएं भी ठप पड़ी हैं.

