पहला दिन: चैत्र नवरात्रि का आरंभ इस बार 19 मार्च, बुधवार से हो रहा है. पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. मां शैलपुत्री को सफेद और पीला रंग बेहद प्रिय है, इसलिए इस दिन उन्हें इन रंगों के वस्त्र अर्पित करना शुभ होता है.

दूसरा दिन: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है. इनका प्रिय रंग पीला और केसरिया माना जाता है. ऐसे में इस दिन मां को पीले या केसरिया रंग की पोशाक पहनाकर उनका श्रृंगार करना अच्छा रहता है.
तीसरा दिन: तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है. इस बार यह दिन शुक्रवार को पड़ रहा है, इसलिए इस दिन मां को गुलाबी या लाल रंग के वस्त्र अर्पित करना शुभ रहेगा.
चौथा दिन: चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना की जाती है. मां को लाल रंग प्रिय है, लेकिन चूंकि यह दिन शनिवार है, इसलिए आप नीले रंग के वस्त्र भी अर्पित कर सकते हैं.
पांचवा दिन: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा होती है. इस दिन लाल या नारंगी रंग के वस्त्र अर्पित करना शुभ माना गया है.
छठा दिन: छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है. इस दिन गुलाबी या महरून रंग के वस्त्र अर्पित करने से मां प्रसन्न होती हैं.
सातवां दिन: सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है. इस दिन चटक लाल रंग के वस्त्र अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है.
आठवां दिन: आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. मां को पीला और मैरून रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन इन्हीं रंगों के वस्त्र अर्पित करने चाहिए.
नौवां दिन: नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. मां को बैंगनी रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन इन्हीं रंगों के वस्त्र अर्पित करने चाहिए.
नवरात्रि का यह पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और मानसिक शांति का भी समय होता है. इन नौ दिनों में व्रत और साधना करने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. साथ ही चैत्र नवरात्रि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि नवमी तिथि को भगवान राम का जन्मोत्सव, यानी राम नवमी, भी मनाया जाता है. इस कारण यह पर्व आस्था और उल्लास दोनों का संगम बन जाता है.
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