News Wave Desk: ‘चांद मेरा दिल’ उन फिल्मों में से है, जिनका ट्रेलर देखकर आप इसकी असली कहानी का अंदाजा नहीं लगा सकते. ट्रेलर के बाद फिल्म के गाने दर्शकों के बीच पहले ही लोकप्रिय हो गए थे, जिससे फिल्म के लिए उम्मीदें और बढ़ गई थीं. हालांकि, सिर्फ अच्छे गाने या स्टारकास्ट से कोई फिल्म हिट नहीं होती, कंटेंट और निर्देशन भी अहम होते हैं.

कहानी: प्यार, जिम्मेदारी और रिश्तों की उलझन

फिल्म की कहानी आरव (लक्ष्य) और चांदनी (अनन्या) नाम के दो इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें कॉलेज के दिनों में प्यार हो जाता है. एक गलती के चलते दोनों परिवार के खिलाफ जाकर शादी कर लेते हैं. कम उम्र में शादी के बाद बढ़ती जिम्मेदारियां जल्द ही दोनों के रिश्ते में दूरियां पैदा कर देती हैं. इसके बाद कहानी असली मोड़ लेती है, जहां प्यार में इंतजार, दर्द और इम्तिहान की झलक देखने को मिलती है. कहानी में रिश्तों की सच्चाई और अलगाव का दर्द दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते कहानी अपनी दिशा खो देती है.
अभिनय: अनन्या और लक्ष्य का नया रूप

इस फिल्म में अनन्या पांडे पूरी तरह से बदली हुई नजर आती हैं. उनका अभिनय न सिर्फ परिपक्व लगता है, बल्कि कई मौकों पर वे अपने किरदार को बखूबी जीती हैं. लक्ष्य की एक्टिंग में रणबीर कपूर की झलक मिलती है, और उन्होंने हर इमोशन को शानदार ढंग से पेश किया है. फिल्म का फोकस सिर्फ इन दोनों किरदारों पर रहता है, बाकी कलाकारों को खास स्क्रीन टाइम नहीं मिलता.
निर्देशन और लेखन: अच्छी शुरुआत, कमज़ोर सेकंड हाफ

निर्देशक विवेक सोनी, जो ‘मीनाक्षी सुंदरेश्वर’ जैसी लीक से हटकर रोमांटिक फिल्म बना चुके हैं, ने यहाँ भी कुछ नया दिखाने की कोशिश की. फिल्म की शुरुआत काफी अच्छी और फ्रेश लगती है, लेकिन इंटरवल के बाद स्क्रीनप्ले कमजोर पड़ जाता है. सेकंड हाफ में कहानी इधर-उधर भटकती है और दर्शक कनेक्ट नहीं कर पाते. लेखकों की टीम, जिसमें तुषार परांजपे और अक्षत घिल्डियाल भी शामिल हैं, क्लाइमैक्स तक आते-आते कहानी का संतुलन नहीं बना पाती.
कमजोरियां और निष्कर्ष

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी भटकती हुई कहानी और अधूरे किरदार हैं. कई दृश्य और संवाद असलियत के करीब हैं, खासकर रिश्तों की टूटन और तलाक के बाद की परिस्थितियां, लेकिन अंत तक आते-आते फिल्म पुराने फॉर्मूले में फंस जाती है. दर्शकों को नएपन की उम्मीद थी, लेकिन क्लाइमैक्स में वही घिसा-पिटा समाधान देखने को मिलता है.
देखें या नहीं?

अगर आप अनन्या पांडे और लक्ष्य का बेहतरीन अभिनय देखना चाहते हैं या टूटे रिश्तों की गहराई को महसूस करना चाहते हैं, तो यह फिल्म देख सकते हैं. लेकिन कहानी और निर्देशन के स्तर पर अगर कुछ नया या खास देखने की उम्मीद है तो यह फिल्म निराश कर सकती है.
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