रांची: झारखंड की आर्थिक तकदीर बदलने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जो खाका खींचा था, उसे अमलीजामा पहनाने की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. 18 मार्च को विधानसभा में दी गई मुख्यमंत्री की गारंटी अब सरकारी दफ्तरों के लिए डेडलाइन बन गई है. मंत्रिमंडल सचिवालय ने स्पष्ट कर दिया है कि योजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं होगी. या तो परिणाम दें, या जवाबदेही के लिए तैयार रहें.
16 अप्रैल तक देनी होगी प्रोग्रेस रिपोर्ट
मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल ने राज्य के सभी आला अधिकारियों को पत्र लिखकर स्पष्ट निर्देश दिया है कि मुख्यमंत्री के संबोधन की हर एक घोषणा का सूक्ष्म अध्ययन करें. विभागों को 16 अप्रैल तक अपनी अनिवार्य रिपोर्ट सौंपनी होगी. सरकार का यह सख्त रुख बताता है कि वह चुनावी वादों से इतर, विकास के बड़े लक्ष्यों को समय से पहले पूरा करना चाहती है.
आधी आबादी को उद्यमी बनाने का बड़ा दांव
झारखंड की महिलाओं के लिए यह खबर गेम-चेंजर साबित होने वाली है. मंईयां बलवान और मंईयां उद्यमी योजनाओं के जरिए महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए 5 करोड़ रुपये तक का आसान कर्ज मुहैया कराया जाएगा.राज्य की ग्रामीण और शहरी महिलाओं को सीधे बड़े बिजनेस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जोड़ना उद्देश्य है.
जर्मनी और यूके से जुड़ेगा ‘नॉलेज कॉरिडोर’
झारखंड का युवा अब सिर्फ स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भी अपनी धाक जमाएगा. सरकार जर्मनी और इंग्लैंड के साथ मिलकर एक विशेष नॉलेज कॉरिडोर बनाने जा रही है. शिक्षा के क्षेत्र में मरांग गोमके और दिशोम गुरुजी के नाम पर नई डॉक्टोरल स्कॉलरशिप की शुरुआत की जाएगी, जिससे शोध के क्षेत्र में राज्य के छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकें.
इकोनॉमिक बोर्ड और एआइ हब
औद्योगिक निवेश की बाधाओं को खत्म करने के लिए झारखंड स्टेट इकोनॉमिक डेवलपमेंट बोर्ड का गठन किया जा रहा है. झारखंड को केवल खनिजों का प्रदेश न रखकर, इसे क्रिटिकल मिनरल्स, ग्रीन एनर्जी और देश के एआइ हब के रूप में स्थापित करना है. सिंगल विंडो सिस्टम के विस्तार से अब निवेशकों को भटकना नहीं पड़ेगा.
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