CO कहते हैं कि आपकी जमीन है और कानूनी रूप से आप मालिक हैं, पर थाना कहता है- खबरदार जो जमीन पर गए

Hazaribagh: जिले में थानों की कमाई का एक बड़ा जरिया जमीन बन गई है. भले डीजीपी और सरकार के स्तर से थानों...

Hazaribagh: जिले में थानों की कमाई का एक बड़ा जरिया जमीन बन गई है. भले डीजीपी और सरकार के स्तर से थानों को कितने भी निर्देश क्यों न जारी हो जाएं कि थाने में भू-माफिया और दलाल न बैठें और थानेदार किसी जमीन पर दखल-कब्जा दिलाने से दूर रहें, होगा वहीं जो थानेदार चाहेंगे. जमीनी स्तर पर, खासकर इस मामले में, हजारीबाग का रिकॉर्ड सबसे खराब है.

यहां कुछ थानों को छोड़ दिया जाए तो लगभग सभी थानों में भू-माफियाओं का बोलबाला है और उनकी सांठगांठ में गरीबों की जमीन या तो लूट ली जा रही है या फिर उसे मिलीभगत से इस कदर विवादित बना दिया जा रहा है कि जमीन के मालिक को उसे भू-माफियाओं के हाथों बेचना पड़ जा रहा है. जो डटे हैं, वे आज भी इस सिस्टम से लड़ रहे हैं.

पढ़ा-लिखा परिवार भी सिस्टम से परेशान

भू-माफियाओं के साथ गठजोड़ से परेशान एक पढ़ा-लिखा परिवार कटकमदाग थाने का चक्कर काटने को मजबूर है. ऐसा ही एक मामला जिले के कटकमदाग थाना क्षेत्र का है, जिसमें शहर से सटी जमीन खाता 233, खेसरा जीरो, रकवा 32 डिसिमिल, नॉर्थ शिवपुरी, कृष्णानगर में स्थित है.

उक्त जमीन पर जम्बो ज्वॉय स्कूल की दूसरी इकाई के लिए भवन बनाने की योजना है, जिसके लिए स्कूल की संचालिका-निदेशक कंचन देवी और उनके पति पवन कुमार लगातार कटकमदाग थाने के चक्कर लगा रहे हैं. जबकि रजिस्टर-2 समेत उनके सभी कागजात दुरुस्त हैं और सीओ द्वारा बार-बार कहा जाता है कि जमीन उनकी है और कानूनी रूप से वही मालिक हैं, पर इसके उलट थाना कहता है कि खबरदार जो जमीन पर गए.

कागजात सही, फिर भी विवाद खड़ा

ऐसे में भू-माफियाओं के साथ गठजोड़ में चल रहे थाने से परेशान यह परिवार न्याय के लिए भटक रहा है. जिले के वरीय अधिकारियों से मिलने पर आश्वासन तो मिलते हैं, लेकिन मामला थाने तक पहुंचते ही अटक जाता है. भुक्तभोगी कंचन देवी और उनके पति पवन कुमार बताते हैं कि वर्ष 2000 में उन्होंने आठ कट्ठा जमीन खरीदी थी.

इसमें से चार कट्ठा जमीन भू-माफियाओं को बेच दी गई थी. अब जब जमीन की कीमत बढ़ गई है, तो बचे हुए चार कट्ठा जमीन पर भी भू-माफियाओं की नजर है. पहले उन्होंने अच्छे संबंध बनाए रखे और खरीदने की बात करते रहे, लेकिन जैसे ही स्कूल भवन निर्माण का प्रयास शुरू हुआ, थाने से मिलकर जमीन को कागजों में ही विवादित बना दिया गया.

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अंचलाधिकारी की रिपोर्ट में साफ स्थिति

25.07.2025 को अंचलाधिकारी ने अपने पर्चा 997 के तहत पत्र में स्पष्ट लिखा है कि जांच के बाद राजस्व उपनिरीक्षक ने प्रतिवेदन दिया कि आवेदिका कंचन देवी, पति पवन कुमार, द्वारा डीड संख्या 16892 दिनांक 29.11.2000 के माध्यम से मौजा कदमा टू, खाता 233, प्लॉट 09, रकवा 32 डिसिमिल जमीन क्रय की गई.

इसकी जमाबंदी पंजी-2 के भाग 10, पृष्ठ संख्या 125 पर दर्ज है. इसमें 16 डिसिमिल जमीन तारा देवी, पति विजय कुमार दांगी, को बेचने की बात कही गई है. शेष बची 16 डिसिमिल जमीन पर भू-माफियाओं की नजर है और इसमें जिन सरकारी विभागों पर न्याय दिलाने की जिम्मेदारी है, वे ही मिलकर अन्याय कर रहे हैं.

कंपनियों के पक्ष में कार्रवाई के आरोप

फरियाद करते रहे भुक्तभोगी और एलएंडटी को कब्जा दिला दिया गया, ऐसा आरोप भी सामने आया है. कंपनियों के आगे अधिकारी नतमस्तक हैं. कब किसी जमीन पर कंपनी के पक्ष में कब्जा दिला दिया जाएगा, यह कोई नहीं जानता. भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा जमीन को प्रतिबंधित सूची में डालने के बाद से कंपनियों को लाभ मिल रहा है. आरोप है कि वे किसी भी जमीन पर दावा कर कब्जा ले लेती हैं.

सदर प्रखंड में जमीन पर कब्जा दिलाने का आरोप

ऐसी ही एक शिकायत मनी हज्जाम वैगरह, पिता जैनाथ हज्जाम, के परिजनों ने की है. मामला सदर प्रखंड का है. उनका आरोप है कि शनिवार को स्वयं सीओ उनके जमीन पर पहुंचे और अतिक्रमण बताते हुए निर्माण स्थल को ढहाकर जमींदोज कर दिया.

इस कार्रवाई के जरिए उनकी जमीन का कब्जा दिला दिया गया. जबकि वर्ष 1992 तक उस जमीन की रसीद कटी हुई है और उस पर कोर्ट का डिग्री भी है, जिसका टाइटल सूट नंबर 17/2003, दिनांक 30 सितंबर 2024 है.

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