रांची: राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका खुलासा तत्कालीन सीआई (अंचल निरीक्षक) के द्वारा किया गया है. तत्कालीन सीआई कुमार सत्यम भारद्वाज द्वारा विभागीय पत्रांक 1295 (राजस्व) दिनांक 18 अप्रैल 2024 के आलोक में प्रस्तुत साक्ष्यों से इसका खुलासा हुआ है. साक्ष्य कह रहे हैं कि विभाग में नियम-कानून नहीं, बल्कि सिंडिकेट का खेल चल रहा है,जहां ईमानदारी की कीमत करियर गंवाकर चुकानी पड़ रही है. तत्कालीन सीआई सत्यम भारद्वाज का कहना है, कि मामले की गंभीरता इसी बात से समझी जा सकती है कि उन्होंने ने पांच अगस्त 2019 को बालूमाथ में योगदान दिया, लेकिन उनके आने से करीब डेढ़ साल पहले ही (18 जनवरी 2018 को) राजस्व उप निरीक्षक मनोज बेक द्वारा सी.एस. पंजी II (पुराना) की कथित जांच कर नया आरएस पंजी II संधारित कर दिया गया और बढ़न महतो के नाम रसीद भी काट दी गई. जब भारद्वाज को जमीन के इस खेल में हेर-फेर की आशंका हुई, तो उन्होंने जांच के लिए सी.एस. पंजी II की मांग की. काफी टालमटोल के बाद 19 मई 2021 को पंजी उपलब्ध कराई गई, जिसकी जांच के मात्र आठ दिन बाद ही मनोज बेक उसे वापस ले गए.

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पंजी II के संधारण में भ्रष्टाचार का पलामू मॉडल
तत्कालीन सीआई ने आगे कहा की कैडेस्ट्रल सर्वे (CS) पंजी II, जो 1932 के आसपास बनी थी, उसे रिवीजनल सर्वे पंजी II में बदलने का काम पलामू प्रमंडल में भ्रष्टाचार का मुख्य जरिया बन गया है. 2005 से 2016 के बाद तक हाथों से पंजी II बनाई जाती रही। आरोप है कि कई अंचल अधिकारी (सीओ) बिना किसी प्रॉपर चैनल या वैध प्रतिवेदन के जमाबंदी कायम कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर रैयतों के आर्थिक दोहन का जरिया है. पहले राजस्व उप निरीक्षक इसे संधारित करते थे, बाद में विभाग ने सीओ को यह शक्ति दी. बालूमाथ में इसी शक्ति का दुरुपयोग कर सीएस खाता 206 से आर.एस. खाता 279 में कई रैयतों का खाता संधारित किया जाना असंवैधानिक है.

नावल्द जमीन या वंशज का दावा?
सत्यम भारद्वाज का कहना है कि विवाद का मुख्य केंद्र श्री बालेश्वर महतो (आवेदक) द्वारा आरएस जमाबंदी के लिए दिया गया आवेदन है. जांच में पाया गया कि, जमीन को धरम महतो का ‘नावल्द’ (बिना उत्तराधिकारी के छोड़ी गई जमीन) मानकर सरकारी बंदोबस्त का मामला बनाया गया. दूसरी ओर, आरएस खतियान में उसी जमीन पर धरम महतो के पोते बढ़न महतो का नाम दर्ज है.
सवाल यह है,यदि बढ़न महतो पोता है, तो जमीन नावल्द’ मानकर बंदोबस्त करना गलत है, और यदि वह पोता नहीं है, तो खतियान में छेड़छाड़ करने का अधिकार सीओ को नहीं, बल्कि व्यवहार न्यायालय को है. दोनों ही स्थितियों में भारी आर्थिक लेन-देन की आशंका जताई गई है.

सच बोलने पर मिली सजा:
सत्यम भारद्वाज ने जब इस पूरे मामले में अपर समाहर्ता पर सीधे आरोप लगाते हुए अपना स्पष्टीकरण सौंपा, तो विभाग ने अंधा, बहरा और गूंगा बनने का रास्ता चुना। भ्रष्टाचार उजागर करने वाले भारद्वाज का तबादला कर दिया गया और उनके जाने के बाद राजस्व उप निरीक्षक पर दबाव बनाकर बैक-डेट से मामला दर्ज किया गया. अंततः उन्हें पदोन्नति से वंचित करते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई. यह मामला फिलहाल माननीय न्यायालय के विचाराधीन है.
सुधीर जायसवाल को एक दिन की वेतन कटौती का दंड मिलने के बावजूद विभाग ने उन्हें सीआई पद पर प्रोन्नत कर दिया. फुलेश्वर साव के ऊपर चतरा और बोकारो में सरकारी भूमि और राशि के गबन के आरोपों को लंबित रखा गया , जांच का दिखावा कर बिना निर्णय लिए उन्हें सीओ बना दिया गया. कुमार सत्यम भारद्वाज का यह कहना कि सिस्टम में शामिल रहने पर कब का प्रमोशन मुझे भी मिल गया होता. मुझ पर न तो सरकारी भूमि या राशि के गबन का आरोप है ना ही आज तक मुझ पर कोई आरोप सिद्ध हुआ है. पंजी ii में छेड़छाड़ राजस्व उप निरीक्षक से संबंधित है उसकी गवाही नहीं ली गई. पंजीयों के लेन देन का पावती है तो यह स्वेच्छाचारिता नहीं है और कार्यालय के निर्गत पंजी का प्रभारी प्रधान सहायक थे तो उनसे पूछताछ आवश्यक था. पंजी ii देखते समय मनोज बेक के अलावे अनुसेवक जगन्नाथ प्रसाद गुप्ता भी उपस्थित थे उनसे पूछताछ नहीं करना यह विभाग की घोर स्वेच्छाचारिता है मेरी नहीं.


