विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: झारखंड स्टेट बार काउंसिल के चुनाव की मतगणना एक बेहद दिलचस्प और पेचीदा मोड़ पर पहुंच गई है. वोटों की गिनती जारी है, लेकिन इस बार के नतीजों ने सभी को चौंका दिया है. चुनाव के शुरुआती रुझानों और पहली वरीयता के वोटों की गिनती समाप्त होने के बाद भी अब तक एक भी उम्मीदवार मैजिकल फिगर यानी जीत के लिए निर्धारित कोटा तक नहीं पहुंच पाया है.
कोटा का गणित बना चुनौती
काउंसिल के नियमों के अनुसार, किसी भी उम्मीदवार की जीत तभी सुनिश्चित मानी जाएगी, जब वह न्यूनतम निर्धारित कोटा प्राप्त कर ले. इस बार यह कोटा 677 वोट तय किया गया है. पहली वरीयता की गिनती में कोई भी दिग्गज इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सका, इसलिए अब चुनाव परिणाम पूरी तरह से दूसरी वरीयता के वोटों के ट्रांसफर पर निर्भर हो गया है.
टॉप उम्मीदवारों की स्थिति
मैदान में उतरे उम्मीदवारों में से टॉप-3 चेहरे इस प्रकार हैं. अब्दुल रशीदी 645 वोटों के साथ सबसे आगे हैं, जो कोटा से 32 वोट दूर हैं. प्रशांत सिंह 517 वोट के साथ दूसरे स्थान पर हैं. ललित यादव 510 वोट के साथ तीसरे स्थान पर बने हुए हैं. हालांकि अब्दुल रशीदी जीत के आंकड़े के सबसे करीब हैं, लेकिन तकनीकी रूप से जब तक वे 677 का आंकड़ा पार नहीं करते, उन्हें विजयी घोषित नहीं किया जा सकता.
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एलिमिनेशन राउंड में बाहर हो रहे उम्मीदवार
दूसरी तरफ मतगणना की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कम वोट पाने वाले उम्मीदवारों को एलिमिनेशन राउंड के तहत बाहर किया जा रहा है. अब तक 22 उम्मीदवारों को हारा हुआ घोषित कर उन्हें रेस से बाहर कर दिया गया है.
दूसरी वरीयता के वोटों पर टिकी उम्मीद
नियमों के मुताबिक, सबसे कम वोट पाने वाले उम्मीदवार को बाहर कर दिया जाता है और उनके मतपत्रों पर दर्ज दूसरी वरीयता के वोटों को अन्य सक्रिय उम्मीदवारों के खाते में जोड़ दिया जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार उम्मीदवारों की संख्या अधिक होने और वोटों के बिखराव के कारण किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में एकतरफा मतदान नहीं हुआ है.
किसके हाथ होगी कमान?
यही कारण है कि पहली वरीयता में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला. अब एलिमिनेट हुए उम्मीदवारों के दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती ही यह तय करेगी कि झारखंड स्टेट बार काउंसिल की कमान किन 25 सदस्यों के हाथों में होगी.
