News Desk: दिनभर की भागदौड़ के बाद जैसे ही हम आराम करने के लिए बिस्तर पर जाते हैं, हाथ अपने-आप फोन की तरफ बढ़ जाता है. हम सोचते हैं बस कुछ मिनट देखेंगे, लेकिन कब यह आदत लंबे समय तक स्क्रॉल करने में बदल जाती है, इसका एहसास भी नहीं होता.

शुरुआत में लगता है कि हम बस थोड़ा रिलैक्स होने के लिए फोन देख रहे हैं, लेकिन सच ये है कि यही आदत धीरे-धीरे हमारी नींद की सबसे बड़ी दुश्मन बन जाती है. “बस 5 मिनट” से शुरू हुआ स्क्रॉल कब घंटों तक चलने लगता है, पता ही नहीं चलता. इससे दिमाग शांत होने की बजाय और ज्यादा एक्टिव हो जाता है, जिससे नींद आने में दिक्कत होती है. आइए समझते हैं कि डूम-स्क्रॉलिंग कैसे आपकी रातों की नींद खराब कर रही है.
ब्लू लाइट का असर
हमारा शरीर एक प्राकृतिक टाइमटेबल के अनुसार काम करता है, जिसे बॉडी क्लॉक कहा जाता है. जैसे ही रात होती है, दिमाग मेलाटोनिन नाम का हार्मोन बनाना शुरू करता है, जो शरीर को आराम करने और सोने का संकेत देता है. लेकिन जब आप सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप या टीवी स्क्रीन देखते हैं, तो उससे निकलने वाली ब्लू लाइट इस पूरे सिस्टम को गड़बड़ कर देती है. यह दिमाग को यह समझने नहीं देती कि अब रात हो चुकी है, जिससे मेलाटोनिन का बनना धीमा पड़ जाता है.
इसका असर यह होता है कि नींद आने में देरी होती है, नींद गहरी नहीं आती और बार-बार आंख खुलती है। लंबे समय तक ऐसा करने से आपकी नींद का रूटीन पूरी तरह बिगड़ सकता है और सुबह उठने पर थकान भी महसूस होती है.
दिमाग रहता है एक्टिव
अच्छी नींद के लिए जरूरी है कि दिमाग शांत और रिलैक्स हो, लेकिन डूम-स्क्रॉलिंग इसका उल्टा असर डालती है. जब आप रात में फोन पर तेज़, भावनात्मक या तनाव बढ़ाने वाला कंटेंट देखते हैं—जैसे बहस, नेगेटिव खबरें या चौंकाने वाले वीडियो—तो दिमाग और ज्यादा सतर्क हो जाता है.
ऐसे में दिमाग लगातार उस जानकारी को समझने और सोचने में लगा रहता है, जिससे उसे आराम नहीं मिल पाता. यही वजह है कि शरीर थका होने के बावजूद दिमाग सोने के लिए तैयार नहीं होता और नींद आने में दिक्कत होती है.
तनाव और बढ़ता कोर्टिसोल
डूम-स्क्रॉलिंग करते समय हम अक्सर ऐसी चीजें देखते हैं जो मन पर असर डालती हैं—जैसे बुरी खबरें, हादसे या दूसरों की चमकदार लाइफ. इन्हें देखकर अनजाने में हमारे अंदर चिंता और तुलना की भावना बढ़ने लगती है. इसका असर शरीर पर भी पड़ता है. तनाव बढ़ने पर शरीर में कोर्टिसोल नाम का हार्मोन ज्यादा बनने लगता है, जो हमें सतर्क तो रखता है, लेकिन नींद के लिए ठीक नहीं होता.
जब कोर्टिसोल का स्तर बढ़ा रहता है, तो नींद आने में दिक्कत होती है और नींद गहरी भी नहीं होती. यही कारण है कि सुबह उठने के बाद भी थकान और भारीपन महसूस होता है.
डूम-स्क्रॉलिंग की आदत से कैसे बचें?
अगर रात में फोन चलाने की आदत छूट नहीं रही है, तो कुछ आसान बदलाव आपकी मदद कर सकते हैं—
सोने से पहले दूरी बनाएं
कोशिश करें कि सोने से करीब एक घंटा पहले ही फोन साइड में रख दें, ताकि दिमाग धीरे-धीरे शांत हो सके.
अलार्म का अलग जुगाड़ रखें
फोन को बिस्तर से दूर रखने के लिए अलार्म घड़ी का इस्तेमाल करें, इससे बार-बार फोन उठाने की आदत कम होगी.
स्क्रीन की जगह कुछ और चुनें
सोने से पहले मोबाइल देखने की बजाय किताब पढ़ना या हल्का म्यूजिक सुनना बेहतर विकल्प हो सकता है.
नाइट मोड का इस्तेमाल करें
अगर जरूरी हो तो फोन में ब्लू लाइट फिल्टर या नाइट मोड ऑन रखें, ताकि आंखों और नींद पर कम असर पड़े.
छोटे-छोटे ये बदलाव आपकी नींद को बेहतर बना सकते हैं और डूम-स्क्रॉलिंग की आदत धीरे-धीरे कम हो सकती है.

