सिस्टम में जमे ‘स्थायी बाबू’, 32 करोड़ का खेल: ट्रांसफर नीति बेअसर, पुलिस महकमे की अंदरूनी सच्चाई उजागर

Ranchi: हजारीबाग और बोकारो जिले से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस महकमे की साख...

Ranchi: हजारीबाग और बोकारो जिले से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस महकमे की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं. दोनों जिले के एसपी कार्यालय में तैनात कर्मी द्वारा करीब 32 करोड़ से अधिक रुपया अवैध निकासी के खुलासे ने न केवल वित्तीय प्रबंधन, बल्कि पुलिस विभाग की आंतरिक निगरानी प्रणाली को भी बेनकाब कर दिया है.

ट्रांसफर के नियम सिर्फ अधिकारियों के लिए ?

पुलिस व्यवस्था की एक अजीबोगरीब सच्चाई यह है कि यहां नियम सबके लिए बराबर नहीं हैं, एसपी का कार्यकाल औसतन दो वर्ष, डीएसपी का तीन वर्ष और इंस्पेक्टर का दो से पांच वर्ष तय होता है. लेकिन थानों के मुंशी, पुलिस लाइन के बाबू, और गोपनीय शाखा के कर्मचारी दशकों से एक ही कुर्सी पर जमे हैं. इन कर्मियों के तबादले को अक्सर यह तर्क देकर रोक दिया जाता है कि वे काम के जानकार हैं, लेकिन अब यही विशेषज्ञता भ्रष्टाचार का हथियार बन गई है.सूत्रों की मानें तो मजबूत राजनीतिक पैरवी और विभागीय सांठगांठ के कारण इनका स्थानांतरण फाइलों से बाहर नहीं निकल पाता.

कुर्सी का मोह और भ्रष्टाचार का नेक्सस:

यह मामला महज पैसों की हेराफेरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस जमे हुए तंत्र की उपज है, जहां वर्षों से एक ही पद पर कुंडली मारकर बैठे कर्मियों की पकड़ व्यवस्था पर इतनी मजबूत हो गई है कि वे अब जवाबदेही से ऊपर समझने लगे हैं. जांच में यह बात सामने आई है कि पारदर्शिता के अभाव और लंबे समय तक एक ही स्थान पर टिके रहने के कारण सिस्टम पूरी तरह व्यक्ति-निर्भर हो गया है. इसी का फायदा उठाकर लेखपाल ने सरकारी खजाने में सेंध लगाई.

वर्दी भूली, रसूख में डूबे कर्मचारी:

हैरानी की बात यह है कि पुलिस बल का हिस्सा होने के बावजूद कई कर्मियों को यह भी याद नहीं कि उन्होंने आखिरी बार खाकी वर्दी कब पहनी थी. वे पूरी तरह ‘बाबू’ बन चुके हैं. वहीं, बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी वर्षों से प्रभावशाली नेताओं और अधिकारियों के बॉडीगार्ड के रूप में तैनात हैं, जो एक अन्य प्रकार की अनियमितता को दर्शाता है.

ALSO READ: रांची : हर घर पर बीएलओ स्टीकर अनिवार्य, मतदाता सूची शुद्धिकरण पर जोर, के. रवि कुमार ने दिया निर्देश

पुलिस मुख्यालय का आदेश भी बेअसर जिलों का हाल:

झारखंड पुलिस मुख्यालय के द्वारा कुछ साल पहले पुलिस महकमे में स्वच्छता लाने के लिए वर्षों से एक ही जगह जमे कर्मियों के तबादले का सख्त आदेश दिया था, लेकिन आधिकारिक दस्तावेज गवाही देते हैं कि यह आदेश केवल कागजी शेर साबित हुआ दस्तावेज के अनुसार, बोकारो (61), धनबाद (107), गिरिडीह (58), रामगढ़ (43), कोडरमा (82) और चतरा (86) में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थापित हैं. कुल 152 कर्मियों को चिन्हित कर उनके तबादले का निर्देश दिया गया था, लेकिन यह आदेश कागजों तक ही सिमट गया.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *