EXCLUSIVE: डिफेंसिव मोड में नजर आनी वाली झारखंड पुलिस हेमंत सरकार में हुई अटैकिंग

SAURAV SINGH रांची: झारखंड में कानून-व्यवस्था की तस्वीर तेजी से बदल रही है. राज्य में एक ऐसा भी दौर था जब पुलिस...

SAURAV SINGH

रांची: झारखंड में कानून-व्यवस्था की तस्वीर तेजी से बदल रही है. राज्य में एक ऐसा भी दौर था जब पुलिस अक्सर सुरक्षात्मक (डिफेंसिव) मोड में नजर आती थी और अपराधियों के हौसले बुलंद थे, लेकिन वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार के कार्यकाल में समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं. अब पुलिस अटैकिंग मोड में है.

पिछले 13 महीने में झारखंड पुलिस ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है. अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए पुलिस अब केवल सूचनाओं का इंतजार नहीं करती, बल्कि सक्रिय होकर अपराधियों के गढ़ में दबिश दे रही है. इसी का नतीजा है कि राज्य के कुख्यात अपराधी अब पुलिस की गोली का स्वाद चख रहे हैं. एनकाउंटर की बात की जाए तो रांची पुलिस सबसे ज्यादा अपराधियों के खिलाफ सख्त रही है.

रांची पुलिस और अपराधियों के साथ सबसे अधिक सात एनकाउंटर की घटनाएं हुई हुआ, इसके अलावा धनबाद और जमशेदपुर में दो दो एनकाउंटर की घटना हुई. इसके अलावा बोकारो, चतरा, रामगढ़ और पलामू में भी एनकाउंटर की घटनाएं सामने आई है.

आंकड़ों की जुबानी: 13 महीने का रिपोर्ट कार्ड

पिछले 13 महीनों के आंकड़े पुलिस की इस आक्रामक कार्रवाई की तस्दीक करते हैं. इन आंकड़ों पर नजर डालें तो पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ की घटनाओं में भारी इजाफा हुआ है. पिछले 13 महीनों में पुलिस और अपराधियों के बीच 17 बार आमना-सामना हुआ. इन मुठभेड़ों में पुलिस ने आत्मरक्षा के दौरान कुल 21 अपराधियों पर पुलिस ने नकेल कसी.

मुठभेड़ के दौरान पांच अपराधियों को पुलिस ने ढेर कर दिया, जबकि पुलिस की गोलीबारी में 16 अपराधी घायल हुए, जिन्हें गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा गया. एक समय था जब अपराधी पुलिस को चुनौती देते थे, लेकिन आज पुलिस की सक्रियता ने अपराधियों के बीच खौफ पैदा कर दिया है. सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है राज्य में भयमुक्त वातावरण सुनिश्चित करना.

क्यों बदला माहौल?

जानकारों का मानना है कि पुलिस को मिली फ्री-हैंड वर्किंग स्टाइल और आधुनिक हथियारों के साथ-साथ बेहतर इंटेलिजेंस नेटवर्क ने इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है. राज्य सरकार द्वारा पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने और अपराधियों पर नकेल कसने के सख्त निर्देशों के बाद जमीन पर यह असर दिखने लगा है. झारखंड पुलिस की इस अटैकिंग छवि ने न केवल अपराधियों के सिंडिकेट को तोड़ा है, बल्कि आम जनता के बीच पुलिस के प्रति विश्वास को भी मजबूत किया है. अब देखना यह है कि पुलिस की यह कार्रवाई आने वाले समय में राज्य के अपराध ग्राफ को कितना नीचे ला पाती है.

जाने कब-कब हुई एनकाउंटर किसे लगी गोली, कौन हुआ ढेर और कौन घायल

– 02 अप्रैल 2026: बोकारो के बालीडीह में पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ में एक अपराधी घायल हुआ.

– 16 मार्च 2026 : धनबाद भागाबांध ओपी क्षेत्र के केंदुआडीह बस्ती के पास पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ में दो बदमाशों को गोली लगी, जबकि एक अपराधी भागने के दौरान घायल हो गया.

– 08 मार्च 2026: धनबाद में प्रिंस खान गिरोह के अपराधी और पुलिस के बीच एनकाउंटर में एक अपराधी घायल हुआ.

– 29 जनवरी 2026, जमशेदपुर: अपहरण मामले में तीन कुख्यात अपहर्ता घायल.

– 05 दिसंबर 2025, पिपरवार: जुबेर अंसारी घायल.

– 28 अक्टूबर 2025, जमशेदपुर: एक अपराधी के पैर में गोली लगी.

– 19 अक्टूबर 2025, रांची: विजय नाग हत्याकांड का आरोपी अभिषेक सिंह घायल.

– 14 अक्टूबर 2025, धनबाद: भानु मांझी मुठभेड़ में घायल.

– 13 अक्टूबर 2025, मैक्लुस्कीगंज: प्रभात कुमार राम घायल.

– 13 अक्टूबर 2025, तुपुदाना: सुजीत सिन्हा गिरोह के आफताब को गोली लगी.

– 10 अक्टूबर 2025, रांची: रातू थाना क्षेत्र में दो अपराधी घायल.

– 20 सितंबर 2025, चतरा: उत्तम यादव पुलिस कार्रवाई में मारा गया.

– 11 अगस्त 2025, गोड्डा: सूर्या हांसदा मुठभेड़ में ढेर.

– 31 मार्च 2025: यूपी एसटीएफ, झारखंड एटीएस और जमशेदपुर पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में अनुज कनौजिया मारा गया.

– 27 मार्च 2025: भाजपा नेता अनिल टाइगर हत्याकांड से जुड़ा रोहित एनकाउंटर में घायल हुआ.

– 11 मार्च 2025: 100 से अधिक मामलों में वांछित गैंगस्टर अमन साहू को एटीएस ने मार गिराया.

– 11 जनवरी 2025, रामगढ़: राहुल तूरी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया.

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