रांची: झारखंड में सरकारी खजाने से फर्जी तरीके से वेतन की निकासी करने वाले गिरोह और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सरकार ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल पूरे राज्य में उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया है, बल्कि विभाग के भीतर बैठे उन मठाधीशों को भी हिला दिया है, जो वर्षों से एक ही सीट पर कुंडली मारकर बैठे हैं. गृह विभाग और पुलिस महकमे को इसमें शामिल करना इस बात का संकेत है कि सरकार इस फर्जीवाड़े को अपराध की श्रेणी में रखकर बड़े एक्शन की तैयारी में है.
बोकारो-हजारीबाग के बाद अब पलामू की बारी
वित्त मंत्री ने पलामू के उपायुक्त को तत्काल जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा है. यह मामला तब तूल पकड़ा जब प्रधान महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट में गड़बड़ी के संकेत मिले. शुरुआती जांच ने विभाग की नींद उड़ा दी है, क्योंकि बोकारो और हजारीबाग ट्रेजरी से फर्जी वेतन निकासी की पुष्टि हो चुकी है.
वित्त मंत्री का सख्त निर्देश
ट्रेजरी कोड के अनुसार, निकासी की हर जिम्मेदारी डीडीओ की होती है. वित्त मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि अब तक इस स्तर पर कार्रवाई न होना चिंताजनक है और अब जवाबदेही तय की जाएगी.
तीन साल का नियम: गृह सचिव और डीजीपी को पत्र
इस घोटाले के पीछे सबसे बड़ा कारण एक ही स्थान पर लंबे समय तक जमे कर्मचारियों का नेक्सस माना जा रहा है. वित्त मंत्री ने गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को कड़ा पत्र लिखकर निर्देश दिया है, कि राज्य के सभी जिलों में ऐसे लेखापाल और बिल क्लर्क की सूची तैयार की जाए, जो सालों से एक ही जगह तैनात हैं. वित्त विभाग के उस आदेश का सख्ती से पालन हो, जिसमें 3 साल से अधिक समय तक एक ही पद पर जमे कर्मचारियों को बदलने का प्रावधान है.
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