वित्तीय वर्ष 2025-26: बजट खर्च की सुस्ती से 20–25 हजार करोड़ रुपये सरेंडर होने की आशंका

रांची: वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन में अब गिने-चुने दिन शेष हैं, लेकिन बजट खर्च की रफ्तार चिंताजनक बनी हुई है. 1...

रांची: वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन में अब गिने-चुने दिन शेष हैं, लेकिन बजट खर्च की रफ्तार चिंताजनक बनी हुई है. 1 लाख 45 हजार 400 करोड़ रुपये के कुल बजट में से अब तक लगभग 60 प्रतिशत राशि ही खर्च हो पाई है. केंद्रीय योजना मद में 5472.47 करोड़ रुपये और राज्य योजना मद में 80,752.82 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. मौजूदा स्थिति को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि 20 से 25 हजार करोड़ रुपये तक की राशि सरेंडर करनी पड़ सकती है, जो विकास कार्यों पर सीधा असर डाल सकती है.

अंतिम महीने की सीमा और विभागों की धीमी रफ्तार

वित्तीय नियमों के अनुसार अंतिम माह में विभाग अधिकतम 15 प्रतिशत राशि ही आहरित कर सकते हैं. ऐसे में जिन विभागों ने अब तक पर्याप्त खर्च नहीं किया है, उनके सामने शेष राशि का उपयोग करना बड़ी चुनौती बन गया है. कृषि विभाग को अब भी 1009.85 करोड़ रुपये खर्च करने हैं, जबकि पशुपालन समेत कई विभाग आधी राशि भी उपयोग नहीं कर सके हैं.

इन विभागों में आधी राशि भी खर्च नहीं, बजट उपयोग पर उठे सवाल

वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन से पहले कई विभागों में बजट खर्च की रफ्तार काफी धीमी रही है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अनेक विभाग अब तक अपनी कुल आवंटित राशि का 50 प्रतिशत भी खर्च नहीं कर पाए हैं. इससे विकास योजनाओं की गति और बजट प्रबंधन पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

नीचे प्रमुख विभागों की स्थिति (राशि करोड़ रुपये में) इस प्रकार है:

  • पशुपालन: कुल बजट 580.60 | खर्च 263.36

  • भवन निर्माण: कुल बजट 676.61 | खर्च 513.87

  • उत्पाद: कुल बजट 69.12 | खर्च 32.68

  • खाद्य आपूर्ति: कुल बजट 1886.14 | खर्च 1099.51

  • स्वास्थ्य: कुल बजट 5437.25 | खर्च 3912.20

  • गृह विभाग: कुल बजट 8535.44 | खर्च 6992.59

  • उद्योग: कुल बजट 571.57 | खर्च 256.06

  • कार्मिक: कुल बजट 101.30 | खर्च 66.73

  • जेपीएससी: कुल बजट 47.01 | खर्च 18.95

  • पेयजल: कुल बजट 3841.66 | खर्च 1034.57

  • आपदा प्रबंधन: कुल बजट 530.11 | खर्च 225.74

  • पथ निर्माण: कुल बजट 5221.38 | खर्च 3367.33

  • ग्रामीण विकास: कुल बजट 6641.86 | खर्च 3374.60

  • पर्यटन: कुल बजट 180.39 | खर्च 83.16

  • परिवहन: कुल बजट 162.03 | खर्च 39.38

  • नगर विकास: कुल बजट 2308.14 | खर्च 1064.67

  • अल्पसंख्यक कल्याण: कुल बजट 2116.95 | खर्च 1078.37

  • ग्रामीण कार्य: कुल बजट 5772.72 | खर्च 3955.58

  • पंचायती राज: कुल बजट 1427.45 | खर्च 472.20

  • प्राथमिक शिक्षा: कुल बजट 8641.04 | खर्च 5676.78

  • ऊर्जा विभाग: कुल बजट 10480.47 | खर्च 6513.33

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई महत्वपूर्ण विभागों में बड़ी राशि अब भी शेष है. यदि समय रहते खर्च की गति नहीं बढ़ी तो बड़ी रकम सरेंडर होने की आशंका है, जिससे योजनाओं और विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ सकता है.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *