रांची: झारखंड के जंगलों में अवैध कटान और तस्करी पर वन विभाग के कड़े प्रहार का असर अब सरकारी खजाने में साफ दिखने लगा है. विभाग ने न केवल करोड़ों रुपये मूल्य की अवैध लकड़ियां जब्त की हैं, बल्कि उनकी पारदर्शी नीलामी के जरिए राजस्व प्राप्ति के नए कीर्तिमान भी स्थापित किए हैं. हालिया आंकड़ों के अनुसार राज्य भर के विभिन्न वन प्रभागों में जब्त की गई कीमती लकड़ियों सागवान, साल और गम्हार की नीलामी प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जिससे विभाग को भारी आय हो रही है. अब तक कुल नीलामी से राज्य सरकार को 15 करोड़ से अधिक का सीधा राजस्व प्राप्त हो चुका है.
जब्ती और नीलामी के आंकड़े
वन विभाग की विभिन्न टीमों ने राज्य के कोल्हान, पलामू और संथाल परगना क्षेत्रों में छापेमारी कर करोड़ों रुपये मूल्य की अवैध लकड़ियां जब्त की हैं. अकेले चक्रधरपुर और जमशेदपुर क्षेत्र में पिछले एक वर्ष में जब्त लकड़ियों का मूल्यांकन लगभग 5 से 7 करोड़ रुपये के बीच आंका गया है. झारखंड राज्य वन विकास निगम के माध्यम से आयोजित ई नीलामी में भी भारी सफलता मिली है. चक्रधरपुर में हुई एक ही दिन की नीलामी में 23 लाख की सागवान लकड़ियों की बिक्री हुई. धनबाद वन प्रभाग में अवैध खनन और लकड़ी तस्करी में शामिल जब्त वाहनों और लकड़ियों की नीलामी से लगभग 44 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ. आगामी 16 अप्रैल 2026 को रांची प्रभाग द्वारा 29 लॉट की बड़ी नीलामी प्रस्तावित है, जिससे विभाग को 1 करोड़ से अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद है.
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तस्करी रोकने के लिए नई तकनीक का सहारा
वन विभाग अब केवल जब्ती तक सीमित नहीं है. विभाग ने ई ऑक्शन प्रणाली को अनिवार्य कर दिया है ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो और लकड़ियों की सही कीमत मिल सके. विभाग के अधिकारियों के अनुसार सागवान की लकड़ी के लिए 567 प्रति घन फुट जैसी दरें तय की गई हैं, जिससे आम जनता और कारोबारी सीधे विभाग से जुड़ रहे हैं.
प्रमुख आंकड़े एक नजर में
कुल जब्त लकड़ी: राज्यभर में जब्त अवैध स्टॉक लगभग 20 करोड़ रुपये
हालिया नीलामी: चक्रधरपुर, धनबाद व अन्य क्षेत्रों से करीब 67 लाख रुपये
कुल वार्षिक राजस्व: वन उत्पादों व नीलामी से 15 से 18 करोड़ रुपये
आगामी नीलामी: रांची एवं डोरंडा परिक्षेत्र में 29 लॉट, अनुमानित आय लगभग 1 करोड़ रुपये
