होली पर बिखरेगी इस बार सिमडेगा में फूलों से बने हर्बल गुलाल की खुशबू

सिमडेगा: इस बार की होली में सिमडेगा के ग्रामीण महिलाओं द्वारा फूलों और कृषि उत्पादन से बनाए गए हर्बल गुलाल की खुशबू...

सिमडेगा: इस बार की होली में सिमडेगा के ग्रामीण महिलाओं द्वारा फूलों और कृषि उत्पादन से बनाए गए हर्बल गुलाल की खुशबू फैलेगी. सिमडेगा की महिलाओं द्वारा प्राकृतिक विधि से तैयार की जा रही हर्बल गुलाल की खुशबू महिलाओं की जिंदगी और ग्रामीण परिवेश में बदलाव के रंग बिखेर रही है. सिमडेगा जिले में नारी सशक्तिकरण की मिसाल पेश करती हुई ठेठईटांगर प्रखंड के चांदनी आजीविका स्वयं सहायता समूह एवं पाकरटांड़ के विकास आजीविका स्वयं सहायता समूह सहित केरसई, जलडेगा आदि प्रखंडों के महिला समूह द्वारा प्राकृतिक विधि से हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है.

प्राकृतिक गुलाल बनाने के लिए इन महिलाओं द्वारा पलाश के सूखे फूलों का प्रयोग किया जाएगा. इससे ये लाल रंग की गुलाल तैयार कर रही हैं. वहीं हरा रंग का गुलाल बनाने के लिए सूखा हुआ पालक साग, गुलाबी रंग का गुलाल बनाने के लिए चुकंदर, पीला रंग का गुलाल बनाने लिए हल्दी एवं गेंदा फूल का प्रयोग किया जा रहा है, जो पूर्ण रूप से प्राकृतिक है.इस प्रकार के गुलाल त्वचा को किसी भी प्रकार से नुकसान नही पहुंचता.

गांव की महिलाओं के साथ मिलकर एक समूह बना लिया 

दरअसल, ग्रामीण परिवेश में पिछड़ेपन और नशे के माहौल का दंश झेलने वाली इन महिलाओं को सरकार के जेएसएलपीएस का साथ मिला, तो इन महिलाओं ने भी गांव की महिलाओं के साथ मिलकर एक समूह बना लिया. इसके बाद ये अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति और हौसलों के बदौलत कामयाबी की इबारत लिखने लगी. त्योहारों के अनुरूप ये अपना व्यवसाय करने लगी. अभी होली का त्यौहार है तो ये महिला समूह पिछले कई दिनों से जंगल-जंगल घूमकर पलाश के फूलों को इकठ्ठा करने लगी. पालक साग और गेंदा फूल की खेती की. इसके बाद अरारोट की सहायता से ये महिलाएं होली के लिए बिल्कुल प्राकृतिक तरीके से गुलाल बनाने में जुट गई. समूह की दीदियों का गुलाल बनाने का उत्साह होली पर्व के उमंग को और दुगना कर रहा है. जिले में लगभग 200 से 500 किलो ग्राम का प्राकृतिक गुलाल तैयार किया जा रहा है. जिसे पलाश ब्रांड की पैकेजिंग की जा रही है. दिवाली में यही महिलाएं फूलों का माला बनकर बाजार में बेचती हैं.

गुलाल के बाजार भी प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं 

पलाश मार्ट के जरिए इन महिलाओं को इस गुलाल के बाजार भी प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हैं. बुधवार समाहरणालय सभागार में स्वयं सहायता समूह की दीदियों द्वारा तैयार हर्बल गुलाल का विधिवत शुभारंभ किया गया. डीसी सिमडेगा कंचन सिंह ने हर्बल गुलाल का लोकार्पण कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया. मौके पर उप विकास आयुक्त दीपांकर चौधरी उपस्थित रहे. ये महिलाओं का सशक्तिकरण का ही परिणाम है, कि अब वे आम ही नहीं, बल्कि गुठलियों के दाम भी निकालने की तरकीब ढूंढ ली है. सामूहिक पहल से महिलाएं न सिर्फ खुद को सशक्त बना रहीं हैं, बल्कि वे अन्य महिलाओं के लिए नजीर बनी हैं.

दरअसल, बदलाव की ये बानगी एक दिन का परिणाम नहीं, बल्कि आदिवासी महिलाओं को महीनों व सालों का मेहनत का नतीजा है. महिलाओं के इन प्रयासों को काफी सराहना भी मिलने लगी है.जो महिलायें अपनी शक्ति को पहचान लेती हैं, वही इतिहास रचती हैं और सफलता उनके कदम चूमती है.

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