रांची: झारखंड को बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री का मिशन सेल्फ-रिलायंस अब धरातल पर उतरने को तैयार है. दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डीवीसी) की मनमानी और बकाये के बदले बिजली कटौती के कड़े रुख से आजिज आ चुका झारखंड अब पलटवार की स्थिति में है. झारखंड राज्य संचरण निगम लिमिटेड राज्य में तीन नए पावर ग्रिड चार्ज करने जा रहा है, जिससे न केवल डीवीसी पर निर्भरता खत्म होगी, बल्कि लो-वोल्टेज की समस्या से भी मुक्ति मिलेगी.
धनबाद-गोविंदपुर: एनकेटीएल ग्रिड से सुधरेगी सूरत
धनबाद से गोविंदपुर तक करीब 60 किलोमीटर के दायरे में नार्थ कर्णपूरा ट्रांसमिशन लाइन का काम पूरा हो चुका है. इसकी क्षमता 300 केवी है. वर्तमान में एक ग्रिड पर 15 से 20 सब स्टेशनों का बोझ है. एनकेटीएल के चालू होते ही यह लोड बंट जाएगा. ग्रिड फेल होने की स्थिति में अब पूरा इलाका एक साथ अंधेरे में नहीं डूबेगा.
पाकुड़: अमरापाड़ा ग्रिड भरेगा नई रोशनी
पाकुड़ जिले के लिए अमरापाड़ा ग्रिड का निर्माण संपन्न हो चुका है. इसकी क्षमता 100 एमवीए की है. यह ग्रिड लगभग 50 किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करेगा. इसके चार्ज होते ही पाकुड़ और आसपास के ग्रामीण इलाकों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी.
पूर्वी सिंहभूम: सुरदा (जमशेदपुर) ग्रिड से डीवीसी की विदाई
जमशेदपुर के सुरदा में निर्मित तीसरा ग्रिड पूर्वी सिंहभूम के लिए गेम-चेंजर साबित होगा. अब तक यह इलाका पूरी तरह डीवीसी के इंफ्रास्ट्रक्चर पर टिका था. इस ग्रिड (क्षमता 100 एमवीए ) के शुरू होते ही डीवीसी का हस्तक्षेप खत्म हो जाएगा.
लो-वोल्टेज का शॉक होगा खत्म
संचरण निगम के विशेषज्ञों के अनुसार, इन तीनों ग्रिडों के शुरू होने से सबसे बड़ा बदलाव सब-स्टेशनों के लोड मैनेजमेंट में आएगा. अभी एक ग्रिड पर 15-20 सब-स्टेशन निर्भर हैं, जो घटकर महज 6 से 7 रह जाएंगे. इसका सीधा परिणाम यह होगा कि उपभोक्ताओं को क्वालिटी बिजली मिलेगी और लो वोल्टेज का पुराना दर्द दूर हो जाएगा.
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मुख्यमंत्री कर सकते हैं डिजिटल आगाज
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन परियोजनाओं की लगातार मॉनिटरिंग करते रहे हैं। जानकारी के अनुसार तो इन तीनों ग्रिडों का उद्घाटन मुख्यमंत्री ऑनलाइन माध्यम से कर सकते हैं. गढ़वा और पलामू को पहले ही यूपी की निर्भरता से मुक्त कर रांची से जोड़ने के बाद सरकार की यह दूसरी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.
