Ranchi: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार केवल फाइलों तक सीमित रहने वाले राज्यपाल नहीं हैं. सुदूरवर्ती गांवों का दौरा कर सीधे ग्रामीणों से संवाद करना और उनकी समस्याओं को सुलझाना उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है. उनके द्वारा लिए गए ये फैसले यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि झारखंड विकास के पथ पर अग्रणी राज्य बने.
अपने सहज व्यक्तित्व और जन-जन के राज्यपाल की छवि के साथ उन्होंने न केवल लोक भवन के दरवाजे आम जनता के लिए खोले, बल्कि कई ऐसे प्रशासनिक और विधायी फैसले लिए हैं जो आने वाले समय में राज्य के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होंगे.
शिक्षा और स्वास्थ्य, प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर
राज्यपाल गंगवार ने पदभार संभालते ही उच्च शिक्षा की स्थिति सुधारने की दिशा में कठोर कदम उठाए. उनके द्वारा विश्वविद्यालयों को समय पर दीक्षांत समारोह आयोजित करने और सत्रों को नियमित करने का निर्देश एक बड़ी नजीर बना है. उनका कहना भी है कि मेरा प्रयास है कि शासन की नीतियां समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचें. लोक भवन केवल एक प्रशासनिक परिसर नहीं, बल्कि जनता की अपेक्षाओं का जीवंत केंद्र है.
वे फैसले जो बनेंगे मील का पत्थर
राज्यपाल ने हाल के महीनों में कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतियों को मंजूरी दी है, जिनका सीधा असर राज्य की अर्थव्यवस्था और युवाओं के भविष्य पर पड़ेगा. राज्यपाल ने राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर लंबित डिग्री प्रदान करने और शैक्षणिक कैलेंडर को सुव्यवस्थित करने का ऐतिहासिक निर्देश दिया. यह छात्रों के भविष्य के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच है.
हस्तकरघा और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा
वोकल फॉर लोकल के तहत उन्होंने झारखंड के तसर रेशम और हस्तकरघा क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए विधायी और प्रशासनिक समर्थन दिया. इसे आत्मनिर्भर झारखंड की बुनियाद माना जा रहा है.
पर्यटन हब के रूप में पहचान
बाबा बैद्यनाथ धाम, बासुकीनाथ और मलूटी जैसे धार्मिक स्थलों के योजनाबद्ध विकास के लिए उन्होंने सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव और स्वीकृतियां प्रदान की हैं, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे.
स्वास्थ्य के क्षेत्र में सक्रियता
रेडक्रॉस सोसाइटी के माध्यम से राज्य के हर जिले में स्वैच्छिक रक्तदान को एक सामाजिक आंदोलन बनाने का उनका फैसला स्वास्थ्य सेवाओं के लिए संजीवनी साबित हो रहा है.
संवैधानिक मर्यादा और त्वरित समाधान
विधेयकों की मंजूरी के मामले में राज्यपाल ने हमेशा राज्य के हित और संवैधानिक मर्यादा को सर्वोपरि रखा है. जनजातीय समाज के अधिकारों और सामाजिक न्याय से जुड़े विषयों पर उन्होंने सदैव संवेदनशीलता दिखाई है. हाल ही में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन को ‘पद्म भूषण’ से अलंकृत किए जाने के निर्णय में भी उनकी सकारात्मक भूमिका की सराहना की गई है.
