गुमला: जिला में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतें लंबे समय से प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थीं. लोगों की लापरवाही, नशे में वाहन चलाना और नाबालिगों को गाड़ी देना जैसी वजहों से हादसे लगातार बढ़ रहे थे.
प्रशासन का सख्त कदम
इन हालातों को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लगातार अभियान शुरू किया है.
जागरूकता और जांच अभियान
जिला प्रशासन की ओर से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. कई जगहों पर वाहन जांच कर नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाया जा रहा है, ताकि लोग ट्रैफिक नियमों का पालन करें.
मार्किंग और नुक्कड़ नाटक से जागरूकता
लोगों को जागरूक करने के लिए शहर के कई स्थानों पर स्थायी मार्किंग की गई है. साथ ही नुक्कड़ नाटक के माध्यम से भी लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है.
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DTO की सक्रिय भूमिका
उपायुक्त के निर्देश पर जिला परिवहन पदाधिकारी ज्ञान शंकर जायसवाल भी लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं. प्रशासन के इन प्रयासों को देखते हुए राज्य स्तर पर परिवहन विभाग की टीम को सम्मानित भी किया जा चुका है.
लापरवाही अब भी बनी समस्या
इसके बावजूद हाल के दिनों में कुछ सड़क हादसे सामने आए हैं, जो यह दिखाते हैं कि लोगों की लापरवाही अब भी बड़ी वजह है. कई घटनाएं इतनी दर्दनाक होती हैं कि उन्हें सुनकर लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
ब्लैक स्पॉट की पहचान
जिला प्रशासन ने सड़क सुरक्षा टीम बनाकर ऐसे स्थानों को चिन्हित करना शुरू किया है जहां सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं होती हैं. इन ब्लैक स्पॉट को ठीक करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है.
डीसी की अपील
डीसी प्रेरणा दीक्षित ने कहा है कि प्रशासन अपने स्तर पर पूरी कोशिश कर रहा है, लेकिन जब तक आम लोगों का सहयोग नहीं मिलेगा, तब तक दुर्घटनाओं को पूरी तरह नहीं रोका जा सकता.
नाबालिगों को वाहन न देने की सलाह
उन्होंने लोगों से अपील की है कि नाबालिग बच्चों को वाहन न दें. बच्चों की जिद को समझदारी से संभालें और जरूरत पड़ने पर उनकी काउंसलिंग कराएं.
जुर्माना नहीं, जान बचाना लक्ष्य
प्रशासन ने साफ किया है कि वाहन जांच का उद्देश्य लोगों को परेशान करना नहीं, बल्कि उनकी जान बचाना है.
पोस्टर और अभियान जारी
शहर के कई चौक-चौराहों पर पोस्टर लगाकर भी लोगों को जागरूक किया जा रहा है.
जन सहयोग से ही मिलेगी सफलता
प्रशासन का मानना है कि जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होंगे और नियमों का पालन नहीं करेंगे, तब तक हादसों में कमी लाना मुश्किल है. जन सहयोग से ही सड़क दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है.
