नई दिल्ली/रांची: भारतीय संसदीय लोकतंत्र में अपनी सौम्यता और निष्पक्षता के लिए पहचाने जाने वाले हरिवंश नारायण सिंह के राजनीतिक सफर में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए हरिवंश को राष्ट्रपति कोटे से राज्यसभा का मनोनीत सदस्य नियुक्त किया है. 9 अप्रैल को कार्यकाल समाप्त होने के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि सदन में उनकी भूमिका क्या होगी, लेकिन राष्ट्रपति के इस फैसले ने न केवल उनके अनुभव पर मुहर लगाई है, बल्कि सदन में उनके कद को और ऊंचा कर दिया है.
नीतीश के सिपहसालार से सदन के अभिभावक तक
बिहार की धरती से निकलकर पत्रकारिता के जरिए सार्वजनिक जीवन में पहचान बनाने वाले हरिवंश को 2014 में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने पहली बार उच्च सदन भेजा था. हालांकि इस बार उनकी एंट्री मनोनीत श्रेणी से हुई है, जो कला, साहित्य या सामाजिक सेवा जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में उनके योगदान को रेखांकित करती है.
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उपसभापति के रूप में बेदाग रिकॉर्ड
- हरिवंश का पिछला दशक संसदीय गरिमा को बनाए रखने के नाम रहा है.
- अगस्त 2018: पहली बार राज्यसभा के उपसभापति निर्वाचित हुए.
- सितंबर 2020: दूसरी बार इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद के लिए चुने गए.
फैक्ट फाइल
- नियुक्ति: राष्ट्रपति कोटे से
- कार्यकाल: राज्यसभा में तीसरा कार्यकाल
- पृष्ठभूमि: पूर्व पत्रकार और बिहार के कद्दावर नेता
