RTI आयोग में कैसे तय होती रही नियुक्तियों की दिशा? जानिए पूरा इतिहास

RANCHI: झारखंड सूचना आयोग का इतिहास बताता है कि यहां नियुक्तियां अनुभव के संतुलन पर आधारित रही हैं. जहां आदित्य स्वरूप ने...

RANCHI: झारखंड सूचना आयोग का इतिहास बताता है कि यहां नियुक्तियां अनुभव के संतुलन पर आधारित रही हैं. जहां आदित्य स्वरूप ने प्रशासनिक ढांचा दिया, वहीं न्यायमूर्ति हरि शंकर प्रसाद ने कानूनी गरिमा. बैजनाथ मिश्र और हिमांशु शेखर चौधरी ने जनपक्ष रखा, तो गंगोत्री कुजूर ने सामाजिक प्रतिनिधित्व. इन विभिन्न बैकग्राउंड्स के मेल ने ही झारखंड में आरटीआई के सफर को आगे बढ़ाया है. राज्य गठन के बाद आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त से लेकर सूचना आयुक्तों तक की कुर्सियों पर उन चेहरों को जगह मिली, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में लंबी पारी खेली थी. जहां प्रशासन के अनुभव ने फाइलों की सुस्त रफ्तार को समझा, वहीं न्यायपालिका और पत्रकारिता के बैकग्राउंड ने जनता के सवालों को धार दी थी.

आदित्य स्वरूप (पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त), बैकग्राउंड: भारतीय प्रशासनिक सेवा

आदित्य स्वरूप झारखंड के मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर रहे. वे 1982 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी थे. प्रशासनिक गलियारों में उनकी पहचान एक कड़क और कार्यकुशल अधिकारी के रूप में रही. मुख्य सूचना आयुक्त बनने से पहले वे झारखंड सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों के सचिव और अपर मुख्य सचिव जैसे पदों पर कार्य कर चुके थे. उनके कार्यकाल के दौरान आयोग ने लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाने की कोशिश की थी.

हरि शंकर प्रसाद (पूर्व सूचना आयुक्त), बैकग्राउंड: न्यायपालिका

हरि शंकर प्रसाद का चयन उनकी कानूनी विशेषज्ञता के आधार पर किया गया था. वे झारखंड उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश थे. सूचना आयोग में न्यायिक बैकग्राउंड के व्यक्ति की मौजूदगी से कानून की व्याख्या और अपीलों की सुनवाई में एक अलग गंभीरता देखने को मिली. उन्होंने आरटीआई अधिनियम की धाराओं को न्यायिक दृष्टिकोण से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

बैजनाथ मिश्र (पूर्व सूचना आयुक्त), बैकग्राउंड: पत्रकारिता

बैजनाथ मिश्र झारखंड के वरिष्ठ और सम्मानित पत्रकारों में गिने जाते हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबा अनुभव होने के कारण उन्हें समाज की नब्ज और सरकारी गोपनीयता के बीच के संघर्ष का गहरा अनुभव था. एक सूचना आयुक्त के तौर पर उन्होंने हमेशा पारदर्शिता और लोकहित को प्राथमिकता दी.

हिमांशु शेखर चौधरी (पूर्व सूचना आयुक्त), बैकग्राउंड: पत्रकारिता

हिमांशु शेखर चौधरी भी पत्रकारिता जगत का एक बड़ा नाम रहे हैं. वे मुख्यधारा के मीडिया (टीवी और प्रिंट) में वरिष्ठ पदों पर कार्य कर चुके थे. सूचना आयुक्त के रूप में उनका चयन इसी कोटे से हुआ था. वर्तमान में वे झारखंड राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष के रूप में सेवाएं दे रहे हैं. लेकिन सूचना आयोग में उनके कार्यकाल को जन-संवाद और सरल प्रक्रिया के लिए याद किया जाता है.

गंगोत्री कुजूर (पूर्व सूचना आयुक्त), बैकग्राउंड: राजनीति और समाज सेवा

गंगोत्री कुजूर का बैकग्राउंड राजनीतिक रहा है. वह भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेत्री रही हैं और मांडर विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी रह चुकी हैं. आयोग में उनका चयन सामाजिक और सार्वजनिक जीवन के अनुभव के आधार पर हुआ था. राजनीति से आने के कारण उनके पास जमीनी समस्याओं और सरकारी तंत्र के बीच के अंतर को समझने का व्यापक अनुभव था.

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