रांची: राजधानी के सदर थाना क्षेत्र से लापता हुए नौवीं कक्षा के छात्र हिमांशु मुंडा की सकुशल वापसी ने यह साबित कर दिया है, कि पुलिसिंग केवल डंडे के दम पर नहीं, बल्कि भरोसे और संवेदनशीलता से भी सफल हो सकती है. सदर थाना प्रभारी (इंस्पेक्टर) कुलदीप कुमार की सूझबूझ और कम्युनिटी पुलिसिंग के जरिए 48 घंटों से लापता हिमांशु को रामगढ़ से बरामद कर उसके परिजनों को सौंप दिया गया.
आईफोन और गलत संगत का असर जाने कैसे बिगड़े हालात?
दीपा टोली निवासी और डीएवी बरियातू का छात्र हिमांशु अपने माता-पिता की इकलौती संतान है. पुलिस जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि हिमांशु ने धीरे-धीरे अपनी मां के पर्स से पैसे निकालकर करीब 40 हजार रुपये जमा किए और एक आईफोन खरीद लिया. जब स्कूल में शिक्षकों ने उसके पास महंगा फोन देखा, तो उसे जब्त कर लिया गया और उसके माता-पिता को बुलाकर शिकायत की गई. इस घटना ने हिमांशु के मन पर गहरा असर डाला. घर में तनाव तब और बढ़ गया जब उसकी मां ने उसे कुछ संदिग्ध लड़कों की संगत से दूर रहने के लिए फटकार लगाई. इसी नाराजगी में वह बिना किसी को बताए घर से निकल गया.
48 घंटों का खौफ और पुलिस की एंट्री
दो दिनों तक जब हिमांशु का कोई सुराग नहीं मिला, तो परिवार पूरी तरह टूट गया. पिता (सरकारी कर्मचारी) और मां (शिक्षिका) बदहवास होकर सदर थाना आए. यहां इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार ने एक सख्त पुलिस अधिकारी के बजाय एक अभिभावक की भूमिका निभाई. उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाते हुए सिर्फ एक वाक्य कहा आपका बेटा सुरक्षित है, वह सही सलामत लौटेगा.
डर नहीं, दोस्ती को बनाया हथियार
इंस्पेक्टर कुलदीप कुमार ने जांच के पारंपरिक तरीकों से हटकर मनोवैज्ञानिक रास्ता अपनाया. थानेदार खुद हिमांशु के घर आए और उसके 3-4 करीबी दोस्तों से बात की. पुलिस को देखकर डरे हुए बच्चों को इंस्पेक्टर ने समझाया कि न तो उन्हें डांटा जाएगा और न ही हिमांशु को कोई सजा मिलेगी. पुलिस ने बच्चों को मोटिवेट किया कि वे हिमांशु से संपर्क करें और उसे वापस आने के लिए मनाएं. यह दांव काम कर गया. दोस्तों के जरिए मिले भरोसे के बाद हिमांशु की लोकेशन मिली और उसे रामगढ़ इलाके से बरामद कर लिया गया.
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