Ranchi: बजट सत्र के समापन भाषण में सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत अगर हमारे स्वाभिमान को ललकारेगी, तो हम उसका उसी दृढ़ता और ताकत के साथ जवाब देंगे. जनता की शक्ति से बड़ा इस लोकतंत्र में कोई बल नहीं है. चाहे कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, जनता के सामने टिक नहीं सकता. हमारे संस्कार में अहंकार नहीं है, लेकिन हमारे रोम-रोम, रग-रग में स्वाभिमान बसा है और उस स्वाभिमान के साथ हम किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं कर सकते.

अच्छा शासन ही होता है विकास की नींव : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छा शासन ही विकास की नींव होता है. राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ शहरी और पंचायत स्तर तक सभी जरूरतमन्दों को ससमय मिले, राज्य में चल रही योजनाओं, इंफ्रास्टक्टर प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन तेज गति के साथ चलते रहे. इसे लेकर एक इंटीग्रेटेड सीएम डाटा इंटेलिजेंस प्लेट फॉर्म का निर्माण कर उसे उपयोग में लाया जायेगा. इस पहल के ज़रिए आने वाले समय में योजनाओं का लाभ ले रहे लोगों को फैमिली आइडी के साथ भी जोड़ा जाएगा और पंचायत स्तर तक सर्विस डिलीवरी को आइटी सिस्टम के साथ जोड़ते हुए और मजबूत किया जाएगा.
सिविल सर्वेंट के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम
हेमंत सोरेन ने बताया कि राज्य के सिविस सर्वेंट को फाइनांस, पब्लिक पॉलिसी और इमरजिंग पॉलिसी चैलेंजस पर नॉलेज डेवलपमेंट के लिए एक विशेष वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा, जिसमें हर साल 50 अधिकारियों/पदाधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा. भविष्य में ऊर्जा क्षेत्रों में और कोयला खनन क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को देखते हुए राज्य सरकार एनर्जी ट्रांजिक्सन की नीति को केंद्र में रखते हुए कौशल विकास, भूमि की बेहतर उपयोगिता और इनकम सर्पोट जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को लेकर एक सुनोजियित तरीके से आगे बढ़ेगी. राज्य में इस दिशा में काम करने के लिए हम जर्मनी एवं अन्य देशों के साथ आने वाले समय में एक साझा कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ेंगे.
विश्व आर्थिक मंच पर झारखंड की अपार संभावनाओं को दुनिया के सामने रखा
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व आर्थिक मंच में हमने झारखण्ड की अपार संभावनाओं को दुनिया के सामने रखा. हमारे खनिज संसाधन, हमारे रेयर अर्थ मिनरल्स, हमारी औद्योगिक क्षमता, इन सबने निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है. झारखण्ड को विकसित राज्य बनाने के लिए निवेश और आर्थिक विकास हमारी प्राथमिकता हैं. झारखंड स्टेट इकोनॉमीन डेवलपमेंट बोर्ड का गठन किया जाएगा जो उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने का काम करेगी.
पांच इको टूरिज्म डेस्टीनेशन की स्थापना
साल 2028 तक राज्य में 05 (पाँच) प्रमुख स्थानों में इको टूरिज्म डेस्टीनेशन का निर्माण किया जाएगा. आने वाले समय में प्राइवेट सेक्टर इंवेस्टमेंट के साथ सोलर पार्क, शांति एक्ट के तहत न्यूक्लियर स्मॉल मॉड्यूलर रियेक्टर, ग्रीन स्टील, हेल्थ, एजुकेशन और स्पोर्ट्स आदि क्षेत्रों में निवेश के साथ झारखंड आगे बढ़ेगा.
क्रिटिकल मिनरल्स एंड क्लीन एनर्जी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना
यूके की विश्वस्तरीय संस्थाओं यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम, यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज और इंपेरियल कॉलेज लंदन रॉयल स्कूल ऑफ माइंस के साथ मिलकर राज्य में क्रिटिकल मिनरल्स एंड क्लीन एनर्जी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी. यह सेंटर अगले 10 वर्षों में झारखंड को खनिज आधारित अर्थ-व्यवस्था के सिर्फ़ एक्सट्रक्शन से हटकर वैल्यू क्रियेशन और ग्रीन स्कील्ड टैलेंट का वैश्विक हब बनाएगा तथा राज्य को क्लीन एनर्जी ट्रींजिक्शन के क्षेत्र में एक ग्लोबल बिजनेस पार्टनर के रूप में स्थापित करेगा. क्रिटिकल रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में झारखंड राज्य को ग्लोबल एंड नेशनल हब बनाने की दिशा में देश-विदेश के एक्सपर्ट के साथ मिलकर पॉलिसी रोडमैप बनाया जाएगा.
दिशोम गुरुजी मेमोरियल का निर्माण
मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि राज्य में रोजगार की संभावनाओं और तकनीकी ज्ञान को बढ़ाने के लिए ग्लोबल आइटी कंपनियों के सहयोग से आइटी पार्क को के क्षेत्र में विकसित जाएगा. आदिवासी संस्कृति और पहचान को सहेजने तथा देश के आदिवासी समाज के पुरोधा और झारखंड राज्य निर्माता दिशोम गुरुजी शिबू सोरेन जी के विशाल व्यक्तित्व को सम्मान देने के लिए धुर्वा जलाशय के पास दिशोम गुरुजी मेमोरियल का निर्माण कराया जाएगा, जिसे एक एकीकृत आदिवासी संस्कृति परिसर के रूप में भी विकसित किया जाएगा.
35 मेगा और मोनोलिथ स्थल तथा साहिबगंज स्थित फॉसिल पार्क होगा विकसित
हेमंत सोरेन ने कहा कि ऐतिहासिक पहचान और आदिवासी विरासत को विश्व स्तर पर ले जाने के लिए राज्य में विभिन्न जिलों में स्थित 35 मेगा और मोनोलिथ स्थल तथा साहिबगंज स्थित फॉसिल पार्क को भी विकसित करेंगे तथा अगले 3 वर्षों में हेरिटेज टूरिज्म को अपग्रेड करेंगे. यूके सरकार के सहयोग से इन पुरातन स्थलों को यूके में स्थित स्टोनहेंज की तर्ज पर यूनेस्को वर्ल्ड हेर्टेज साइट का दर्जा दिलाने का प्रयास करेंगे. मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि हमारे श्रमिक और प्रवासी भाई-बहन झारखण्ड की ताकत हैं, हमारी जिम्मेदारी का हिस्सा हैं. उनके कल्याण के लिए हम लगातार काम कर रहे हैं. देश और विदेश दोनों स्तर पर झारखण्ड के लोगों की सहायता के लिए केंद्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि वे जहाँ भी रहें, राज्य उनके साथ खड़ा रहे.
मनरेगा झारखण्ड के करोड़ों श्रमिकों की जीवनरेखा : हेमंत
हेमंत सोरेन ने कहा कि एक ओर हम श्रम शक्ति की सहायता के लिए नित नए कदम उठा रहे हैं तो बड़े भारी मन से केंद्र सरकार के मनरेगा से सम्बंधित निर्णय का हम यहाँ जिक्र करना चाहेंगे. मनरेगा झारखण्ड के करोड़ों श्रमिकों की जीवनरेखा है. देश में सबसे कम मजदूरी झारखण्ड के मजदूरों को मिल रही थी तो जब हमने मजदूरी दर बढ़ाने की मांग की और जब अपेक्षित सहयोग नहीं मिला तो राज्य सरकार ने अपनी ओर से अतिरिक्त भुगतान शुरू किया. पलायन-कुपोषण-सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक दमदार प्रयास था मनरेगा. आज केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की संरचना में किए जा रहे बदलाव गंभीर चिंता का विषय हैं. इसका सीधा असर होगा. झारखण्ड के लाखों मजदूरों का हजारों करोड़ रुपये आज भी केंद्र पर बकाया है. ऐसे में क्या यह सदन चुप रहेगा? क्या हम मजदूरों के हित के प्रश्न पर भी राजनीति में बँटे रहेंगे?
प्रवासी झारखंड फाउंडेशन का होगा गठन
सीएम ने कहा कि श्रमिक कल्याण के लिए झारखंड देश की पहली कांप्रंहेंसिव पॉलिसी लेकर आयी है. इसी को और मज़बूत करते हुए राज्य के श्रमिकों जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काम करने जाते हैं, उनकी मदद के लिए आने वाले समय में हम झारखंड राज्य सुलभ सहायता योजना लेकर आयेंगे. झारखंड के मेहनतकश और प्रवासी भाई-बहन जो देश के बाहर रहते हैं, उनसे राज्य को जोड़ने के लिए प्रवासी झारखंड फाउंडेशन का गठन भी किया जाएगा. देश के अंदर कर्नाटक, दिल्ली, हरियाणा, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बंगाल, केरलम, महाराष्ट्र आदि राज्यों की सरकारों से वार्ता कर वहां में झारखंड के श्रमिकों और प्रवासी लोगों की सहायता के लिए केंद्र बनाया जाएगा. कुछ राज्यों में यह काम शुरू भी हो चुका है. गल्फ और लंदन में भी ऐसे प्रवासी सहायता केंद्र, भारत सरकार के सहयोग से स्थापित किए जाएँगे.
आदिवासी समाज की आवाज आखिर कहाँ उठेगी : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी इसी सत्र के दौरान जब हमारे मंत्री चमरा लिंडा असम में आदिवासी समाज की आवाज उठा रहे थे, तो उन्हें कहा गया- यह झारखण्ड का सदन है, यहाँ असम के आदिवासियों की बात क्यों? अगर यहाँ नहीं उठेगी आदिवासी समाज की आवाज, तो आखिर कहाँ उठेगी? असम हो, मणिपुर हो, या देश का कोई भी कोना- जहाँ भी वंचितों पर अन्याय होगा, झारखण्ड की यह आवाज गूंजेगी. झारखण्ड मुक्ति मोर्चा सत्ता के लिए नहीं संघर्ष के लिए बनी है. अब हमने एक नया संकल्प लिया है- अगले 25 वर्षों में झारखण्ड को विकसित राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने का. हम श्रम आधारित अर्थव्यवस्था को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं. हम समावेशी विकास की ऐसी मिसाल बना रहे हैं, जहाँ हर जाति, हर धर्म और हर वर्ग को समान सम्मान मिले.

