Saraikela: भारत के बदलते युवा की एक प्रेरक तस्वीर सामने आई है, जहां युवा अब नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बन रहा है. स्टार्टअप इंडिया के 10 साल और आत्मनिर्भर भारत की मजबूत होती तस्वीर के बीच यह कहानी नई दिशा दिखा रही है.
बदली सोच, बदला सपना
एक दौर था जब भारतीय युवाओं का सपना सरकारी नौकरी या मल्टीनेशनल कंपनी में काम करना होता था. लेकिन अब यह सोच बदल चुकी है. आज का युवा नौकरी की लाइन में खड़ा नहीं है, बल्कि रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है.
सरायकेला के प्रताप मौर्य बने मिसाल
सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित जयप्रकाश उद्यान निवासी प्रताप मौर्य और उनकी पत्नी जय श्री ने आत्मनिर्भर भारत की सोच को हकीकत में बदला है.
लाखों की नौकरी छोड़ लिया बड़ा फैसला
प्रताप मौर्य एक मल्टीनेशनल कंपनी में सेल्स एंड मार्केटिंग हेड के पद पर कार्यरत थे. उन्हें अच्छा पैकेज, नाम और सुविधाएं मिली हुई थीं, लेकिन परिवार के लिए समय नहीं मिल पा रहा था. इसी वजह से उन्होंने नौकरी छोड़ अपने शहर में कुछ करने का निर्णय लिया.
सरकारी योजना से शुरू हुआ स्टार्टअप
प्रताप मौर्य ने पत्नी जय श्री के साथ मिलकर इको-फ्रेंडली फुटवियर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू की. UCO बैंक से प्रधानमंत्री योजनाओं के तहत लोन लेकर करीब 1 करोड़ रुपये का निवेश किया गया और अत्याधुनिक मशीनों के साथ उत्पादन शुरू हुआ.
WEG ब्रांड बना पहचान
उनके ब्रांड का नाम WEG रखा गया, जिसका संस्कृत में अर्थ है — तेज, प्रगति और गति. आज यह ब्रांड आत्मनिर्भर भारत की रफ्तार का प्रतीक बनता जा रहा है.
महिलाओं को मिला रोजगार
इस यूनिट में 5 से 7 महिलाएं कार्यरत हैं, जो फुटवियर निर्माण के विभिन्न चरणों में काम कर रही हैं. यह पहल महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में भी एक बड़ा कदम है.
सस्ती कीमत में प्रीमियम फुटवियर
WEG ब्रांड के तहत स्लिपर, सैंडल, स्पोर्ट्स शूज, जॉगिंग शूज और क्रॉक्स मॉडल जैसे कई उत्पाद बनाए जा रहे हैं. लॉन्चिंग ऑफर में इनकी शुरुआती कीमत 150 रुपये रखी गई है, जो बड़े ब्रांड्स की तुलना में काफी कम है.
मुनाफा नहीं, रोजगार है लक्ष्य
प्रताप मौर्य का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ कमाई नहीं, बल्कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देना और आम लोगों को किफायती कीमत में बेहतर उत्पाद उपलब्ध कराना है.
आत्मनिर्भर भारत की सच्ची तस्वीर
प्रताप मौर्य और जय श्री की यह कहानी बताती है कि सही सोच, मेहनत और साहस से बड़ा बदलाव संभव है. यह सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं, बल्कि नए भारत की तस्वीर है, जहां युवा नौकरी नहीं, बल्कि अवसर पैदा कर रहा है.
