रांची: राज्य में खनिज संपदा से भरे एक जिले के जिला अधिकारी के खास मेहमान यानी (साले साहब) से एक इंटीरियर डिज़ाइनर ने पैसे ले लिए और काम समय पर पूरा नहीं किया. आमतौर पर उधारी के मामलों में कोर्ट-कचहरी और तारीखों का दौर चलता है लेकिन यहां मामला साहब के ससुराल से जुड़ा था. फिर क्या था जैसे ही साले साहब के पैसे फंसने की खबर उन तक पहुंची तो शांत स्वभाव वाले हाकिम ने साले साहब की विनती सुन ली और पुलिस को पैसा रिकवरी करने में लगा दिया.

इंटीरियर वाले के पास जब थानों से न्योता आने लगा तो हवा का रुख बदलते देर नहीं लगी. इंटीरियर वाले को समझ आ गया कि हाकिम के साले से उलझने का मतलब क्या होता है.
बंद कमरों में हुई चर्चा के बाद अब पैसा किश्तों में वापस करने पर सहमति बनी है. पूरे प्रकरण को देखते हुए यह कहना बिल्कुल ग़लत नहीं होगा कि सरकारी रसूख और पारिवारिक रिश्तों का कॉकटेल जब हवाओं में घुलता है तो सिस्टम अपनी फुल स्पीड में चलता है.

