रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान डीएसपी रैंक के अधिकारियों के पोस्टिंग जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है. विधायक शशिभूषण मेहता सदन में गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग से पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के माध्यम से सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए गए हैं.

चार साल बाद भी नियमित पदस्थापन का इंतज़ार:
सदन में रखे गए आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में डीएसपी के कुल 391 पद सृजित हैं, जिनमें से वर्तमान में केवल 327 अधिकारी ही कार्यरत हैं. राज्य में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अधिकारियों की भारी कमी के बावजूद, जेपीएससी सातवीं से दसवीं के माध्यम से नियुक्त 40 डीएसपी अपनी सेवा सम्पुष्टि के चार साल बाद भी नियमित पदस्थापन का इंतज़ार कर रहे हैं.
प्रतीक्षा की कोई समय-सीमा नहीं:
सदन के पटल पर सरकार द्वारा दिए गए जवाब ने सबको चौंका दिया है. जब यह पूछा गया कि क्या नियुक्ति के बाद पदस्थापन के लिए प्रतीक्षारत रखने की कोई विभागीय समय-सीमा तय है, तो सरकार ने स्पष्ट रूप से अस्वीकारात्मक जवाब दिया. इसका सीधा अर्थ यह है,कि सरकार की नजर में अधिकारियों को अनिश्चितकाल तक बिना जिम्मेदारी के बिठाए रखना नियमानुकूल है.

