रांची: झारखंड में राज्य सूचना आयोग को पुनर्जीवित करने की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ी फाइल को बिना स्वीकृति दिए राज्य सरकार को वापस कर दिया है. राज्यपाल के इस कदम से पिछले चार साल से ठप पड़े सूचना आयोग के कामकाज के जल्द शुरू होने की उम्मीदों पर पानी फिर गया है.
राज्यपाल ने जताई आपत्ति, अंजलि भारद्वाज मामले का दिया हवाला
राज्यपाल ने फाइल लौटाते हुए राज्य सरकार को कड़ा परामर्श दिया है. उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के चर्चित अंजलि भारद्वाज बनाम भारत संघ मामले के फैसले और आरटीआई एक्ट के प्रावधानों का बारीकी से अध्ययन करे.
राज्यपाल ने सरकार से पूछा है, कि क्या नामों की अनुशंसा करते समय इन कानूनी प्रावधानों और उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया है? इसके साथ ही राज्यपाल ने राजभवन को प्राप्त विभिन्न संगठनों और व्यक्तियों के शिकायत पत्रों को भी फाइल के साथ संलग्न कर सरकार को भेजा है.
राजनीतिक नियुक्तियों पर उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, विवाद की मुख्य जड़ प्रस्तावित नामों की पृष्ठभूमि है. सरकार द्वारा जिन नामों का पैनल भेजा गया था, उनमें शामिल थे अनुज कुमार सिन्हा, शिवपूजन पाठक, अमूल्य नीरज खलखो, तनुज खत्री और धर्मवीर सिन्हा. इन नामों के सार्वजनिक होते ही कई सामाजिक संस्थाओं ने विरोध दर्ज कराया था. सबसे बड़ी आपत्ति इस बात पर जताई गई है कि अनुशंसित नामों में से अधिकांश सीधे तौर पर राजनीतिक दलों से जुड़े हैं.
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