झारखंड CID का बड़ा खुलासा: म्यांमार के साइबर स्कैम कंपाउंड में युवाओं को बंधक बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश

रांची: झारखंड पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे एक बड़े साइबर स्लेवरी और मानव तस्करी गिरोह...

रांची: झारखंड पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे एक बड़े साइबर स्लेवरी और मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में कार्रवाई करते हुए रांची साइबर क्राइम थाना पुलिस ने गिरोह के मुख्य एजेंट दाऊद अहमदको मुंबई के डोंगरी इलाके से गिरफ्तार किया है.

जाने क्या है पूरा मामला?:

यह मामला झारखंड के भोले-भले युवाओं को विदेश में आकर्षक नौकरी का लालच देकर उन्हें म्यांमार स्थित केके पार्क जैसे खतरनाक साइबर स्कैम कंपाउंड में तस्करी के जरिए भेजने से जुड़ा है. जांच में सामने आया है कि इन युवाओं को वहां ले जाकर जबरन बंधक बनाया जाता था और उनसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन धोखाधड़ी कराई जाती थी.

कैसे काम करता था यह गिरोह:

सीआईडी ने बताया कि।इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिर थी. ये गिरोह अनधिकृत एजेंटों के माध्यम से युवाओं को बैंकॉक, कंबोडिया, लाओस और थाईलैंड में ‘डाटा एंट्री’ की हाई-प्रोफाइल नौकरी का ऑफर दिया जाता था. वीजा और हवाई टिकट के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी. विदेश पहुंचने पर उन्हें स्कैम सेंटर ले जाया जाता था, जहां उन्हें साइबर ठगी करने की ट्रेनिंग दी जाती थी. पीड़ितों को सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर विदेशी नागरिकों को फंसाने का काम दिया जाता था. उन्हें निवेश के नाम पर लोगों को ठगने और फर्जी वेबसाइटों के लिंक भेजने के लिए मजबूर किया जाता था. जिन युवाओं को तस्करी कर ले जाया जाता था, उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया जाता था. उन्हें स्कैम सेंटर से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी और बेहद कठिन परिस्थितियों में जबरन काम कराया जाता था.

मुख्य आरोपी हुआ गिरफ्तार:

सीआईडी ने मुंबई पुलिस की सहायता से दाऊद अहमद को गिरफ्तार किया है, जो मूल रूप से पटना (बिहार) का निवासी है.इससे पहले इस मामले में उसके एक अन्य प्रमुख सहयोगी सरताज आलम को जमशेदपुर से गिरफ्तार किया जा चुका है. पुलिस ने आरोपी के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, पासपोर्ट और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं.

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