झारखंड: आम नागरिकों को पुलिस कार्यालयों के चक्कर काटने के बजाय ऑनलाइन माध्यम से पारदर्शी व त्वरित सेवाएं मिलेगी. उल्लेखनीय है कि डिजिटल पुलिसिंग और नागरिक सेवाओं की समीक्षा के लिए 20 फरवरी को उच्चस्तरीय बैठक, गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अध्यक्षता में डिजिटल पुलिस पोर्टल और अनिवार्य नागरिक सेवाओं के प्रभावी रूप से काम करने के लिए उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी. यह बैठक केंद्र सरकार के निर्देशों को लेकर होगी. इस बैठक का मुख्य केंद्र एनसीआरबी के डिजिटल पुलिस पोर्टल और नौ अनिवार्य नागरिक सेवाओं के मॉनिटरिंग की स्थिति का जायजा लेना है. सरकार का लक्ष्य है कि आम नागरिकों को पुलिस कार्यालयों के चक्कर काटने के बजाय ऑनलाइन माध्यम से पारदर्शी और त्वरित सेवाएं मिल सकें.

इन नौ अनिवार्य सेवाओं पर रहेगा फोकस:
– ऑनलाइन शिकायत दर्ज करना और उसकी स्थिति जानना.
– एफआईआर की प्रतियां प्राप्त करना
– गिरफ्तार या वांछित अपराधियों का विवरण.
– लापता या अपहृत व्यक्तियों की जानकारी.
– चोरी या बरामद वाहनों और संपत्ति का विवरण.
– विभिन्न एनओसी जारी करना या उनका नवीनीकरण.
– नौकरी, पासपोर्ट और वरिष्ठ नागरिक पंजीकरण के लिए सत्यापन.
– सूचना साझा करने की सुविधा.
– पुलिस संबंधी आवश्यक फॉर्म डाउनलोड करना.
इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को मजबूत करना अनिवार्य है:
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा भेजे गए संदर्भ के अनुसार, एक जुलाई 2024 से लागू हुए तीन नए कानूनों भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के सफल कार्य के लिए इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को मजबूत करना अनिवार्य है.सरकार का उद्देश्य न्याय प्रणाली को पीड़ित-केंद्रित और तकनीक-सक्षम बनाना है.
सरकार के संयुक्त सचिव, ओम प्रकाश तिवारी द्वारा जारी पत्र में डीजीपी,आईजी निगरानी, जैप के डीआईजी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को वर्तमान रिपोर्ट के साथ बैठक में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है.
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