झारखंड: बिना अलॉटमेंट वाले बंगले पर मेहरबान पेयजल विभाग, निकाला 44 लाख का टेंडर

रांची: बिना अलॉटमेंट वाले बंगले पर पेयजल विभाग मेहरबान है. इसको लेकर 44 लाख रुपया का टेंडर निकाला गया है. और इसकी...

रांची: बिना अलॉटमेंट वाले बंगले पर पेयजल विभाग मेहरबान है. इसको लेकर 44 लाख रुपया का टेंडर निकाला गया है. और इसकी जानकारी शायद ही ऊपर के अधिकारियों को हो रही है. इससे पहले भी झारखंड में इंजीनियर्स कैसे काम करते हैं, इसकी बानगी वीरेंद्र राम पेश कर चुके हैं. ताजा मामला पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का सामने आ रहा है. विभाग की तरफ से एक ऐसे सरकारी बंगले का रेनोवेशन कराया जा रहा है, जो किसी के नाम पर अलॉट ही नहीं है. इतना ही नहीं इससे पहले भी इस बंगले में जो रह रहे थे, वो बिना अलॉटमेंट के ही रह रहे थे. बंगला बूटी मोड़ के पास है. क्वाटर नंबर है बी-1.

बंगले की मरम्मत पर खर्च होंगे 25 लाख और 17 लाख से बाउंडरी का होगा मेनटेनेंस:

बूटी मोड़ स्थित बंगला नंबर बी-1 की मरम्मत दो हिस्सों में होगा. इसलिए टेंडर भी दो बार निकाला गया है. पहला टेंडर बंगले को दुरुस्त करने के लिए निकाला गया है. जिसपर विभाग करीब 25 लाख रुपए खर्च कर रहा है. वहीं दूसरे हिस्से का टेंडर निकाला गया है, वो सिर्फ बाउंडरी मरम्मी के लिए निकाला गया है. विभाग की तरफ से सिर्फ बाउंडरी मरम्मती के लिए 17 लाख का टेंडर निकाला गया है. बताया जाता है कि बंगला काफी बड़े हिस्से में फैला हुआ है. लेकिन फिलहाल यह बंगला किसी के नाम पर अलॉट नहीं है. फिर इस बंगले पर इतना खर्च करने पर अब सवाल उठ रहे हैं.

आखिर दो हिस्सों में टेंडर क्यों:

अब सवाल उठता है कि आखिर बंगले की मरम्मत करने के लिए टेंडर को दो हिस्से में आखिर क्यों निकाला गया है. जबकि बंगले तो एक ही है. जानकारों ने बताया कि दरअसल किसी भी कार्यपालक अभियंता को यह पावर होता है कि वो अपने स्तर से 25 लाख तक टेंडर निकाल सकेता है. अब अगर बंगला के मरम्मत का टेंडर एक बार में ही निकाला जाता तो फिर कार्यपालक अभियंता के स्तर से यह टेंडर नहीं निकाला जा सकता था. इसके लिए फिर विभाग से अगल से अनुमति लेनी पड़ती. इसलिए टेंडर को तोड़ कर दो बार में निकाला गया है. ऐसा कार्यपालक अभियंता ने क्यों किया उसका जवाब अब वही दे सकते हैं.

क्या कहा विभाग के अधिकारी ने:

Newswave ने इस मामले पर कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर से बात की. पहले तो उन्होंने ऐसे किसी टेंडर की जानकारी से इनकार किया. फिर कहा कि इस बंगले की मरम्मत के लिए दो बार एस्टेमिट बना था. इसलिए टेंडर दो बार करके निकाला गया है. अभी यह बंगला किसी के नाम पर अलॉट नहीं है. लेकिन भविष्य में किसी अधिकारी को इसकी जरूरत पड़ सकती है. इसलिए इसे मरम्मत किया जा रहा है.

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