झारखंड राज्यसभा चुनाव: सियासी उबाल के बीच मनी पावर और क्रॉस वोटिंग पर टिकी सबकी नजर

रांची: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव ने सूबे की सियासत में हलचल तेज कर दी है....

रांची: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव ने सूबे की सियासत में हलचल तेज कर दी है. एक तरफ महागठबंधन के भीतर संभावित भीतरघात की आशंका जताई जा रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी इस मौके को भुनाने की रणनीति में जुटी है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इस बार ऐसे प्रभावशाली और आर्थिक रूप से मजबूत उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जा सकता है, जिनके पास न केवल राजनीतिक रसूख हो, बल्कि विधायकों की निष्ठा को प्रभावित करने की क्षमता भी हो. अब नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री अपने गठबंधन को एकजुट रख पाते हैं या फिर बीजेपी राज्यसभा चुनाव के जरिए नई सियासी पटकथा लिखने में सफल होती है.

क्या है एनडीए की रणनीति

बीजेपी को एक सीट जीतने के लिए 4 अतिरिक्त विधायकों की जरूरत है. पार्टी की रणनीति ऐसे उम्मीदवार को उतारने की मानी जा रही है, जो कांग्रेस या राजद के असंतुष्ट विधायकों में सेंध लगा सके. बीजेपी खास तौर पर कांग्रेस के उन विधायकों पर नजर बनाए हुए है, जो अपनी ही सरकार से नाराज बताए जा रहे हैं.

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मनी पावर और क्रॉस वोटिंग की चर्चा

राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बीजेपी बिहार के उस मॉडल को दोहरा सकती है, जहां राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के जरिए समीकरण बदल दिए गए थे. पार्टी की नजर महागठबंधन के 4 से 6 ऐसे विधायकों पर बताई जा रही है, जो या तो पाला बदल सकते हैं या फिर मतदान के दौरान अनुपस्थित रह सकते हैं.

क्या कहता है गणित

गणितीय रूप से देखा जाए तो महागठबंधन के पास दोनों सीटें जीतने की पर्याप्त ताकत है. हालांकि पेच इस बात में फंसा हुआ है कि झामुमो दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना चाहती है, जबकि कांग्रेस अपनी 16 सीटों के आधार पर एक सीट पर दावा कर रही है. असम चुनाव को लेकर झामुमो और कांग्रेस के बीच बढ़ी खटास का फायदा बीजेपी उठाने की कोशिश में है.

क्या फंसेगा पेच

झारखंड की राजनीति में अंतिम समय में समीकरण बदलने के उदाहरण पहले भी देखे जा चुके हैं. यदि झामुमो और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बनती है, तो क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ सकती है. कांग्रेस के कुछ विधायक पहले भी अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं. ऐसे में अगर बीजेपी 4 विधायकों का समर्थन जुटाने में सफल हो जाती है, तो महागठबंधन के हाथ से एक सीट निकल सकती है.

किसके पास कितनी ताकत

महागठबंधन

झामुमो: 34 विधायक

कांग्रेस: 16 विधायक

राजद: 04 विधायक

वाम दल: 02 विधायक

कुल: 56 विधायक

 

एनडीए

बीजेपी: 21 विधायक

आजसू, जदयू, लोजपा: 03 विधायक

कुल: 24 विधायक

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