झारखंड के विकास को मिली ट्रेड की रफ्तार, व्यापार सुगमीकरण और पारदर्शिता से बढ़ा सरकारी राजस्व

रांची: झारखंड के शहरी क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों ने नई ऊंचाइयों को छुआ है. राज्य सरकार द्वारा व्यापार सुगमीकरण की दिशा में...

रांची: झारखंड के शहरी क्षेत्रों में व्यापारिक गतिविधियों ने नई ऊंचाइयों को छुआ है. राज्य सरकार द्वारा व्यापार सुगमीकरण की दिशा में उठाए गए कदमों का सीधा असर अब धरातल पर दिखने लगा है. प्रदेश के नगर निकायों में ट्रेड लाइसेंस के प्रति व्यापारियों का बढ़ता रुझान न केवल अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है, बल्कि यह राज्य के संगठित और सुरक्षित व्यापारिक भविष्य की एक नई इबारत लिख रहा है.

क्यों जरूरी है ट्रेड लाइसेंस

ट्रेड लाइसेंस मात्र एक कानूनी अनिवार्यता नहीं है, बल्कि यह किसी भी व्यवसायी के लिए विश्वसनीयता का प्रमाण पत्र है. यह सुनिश्चित करता है कि आपका व्यवसाय सरकारी मानकों और सुरक्षा नियमों के अनुरूप चल रहा है. एक वैध ट्रेड लाइसेंस होने से व्यापारी को न केवल बैंकिंग सुविधाओं और ऋण प्राप्ति में आसानी होती है, बल्कि यह उपभोक्ता के मन में उस प्रतिष्ठान के प्रति अटूट विश्वास पैदा करता है. यह शहर के व्यवस्थित विकास में व्यापारियों की भागीदारी का प्रतीक है, जिससे प्राप्त राजस्व का उपयोग अंततः बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाता है.

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क्या कहता है सरकार का आंकड़ा

नए व्यवसायों का उदय: स्वरोजगार और नए स्टार्टअप्स की लहर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ट्रेड लाइसेंस के लिए कुल 1,35,692 नए आवेदन प्राप्त हुए. इससे सरकार के खजाने में 16 करोड़ 99 लाख 23 हजार 709 रुपए का राजस्व आया, जो राज्य के आर्थिक विस्तार को दर्शाता है.

• पुराने व्यापारियों का अटूट विश्वास: लाइसेंस रिन्यूअल (नवीनीकरण) के तहत कुल 2,75,461 व्यापारियों ने अपने लाइसेंस का नवीनीकरण कराया, जिससे 27 करोड़ 24 लाख 10 हजार 177 रुपए की आमदनी हुई.

• पारदर्शिता और सुधार: लाइसेंस में सुधार के लिए आए 1,887 आवेदन आए, जिससे 7.26 लाख की आमदनी हुई.

• व्यवस्थित बाजार की ओर कदम: हालांकि 11,104 लाइसेंस सरेंडर किए गए, लेकिन इसे बाजार के पुनर्गठन और डेटा के शुद्धिकरण के रूप में देखा जा रहा है, जिससे केवल सक्रिय व्यवसायी ही रिकॉर्ड में रहें.

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