विनीत आभा उपाध्याय
रांची: झारखंड सचिवालय सेवा के अधिकारी और वर्तमान में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (ASO) के पद पर तैनात संतोष मस्ताना की गिरफ्तारी के बाद JSSC CGL पेपर लीक कांड में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. CID की अब तक की (सीआईडी) की तफ्तीश में यह स्पष्ट हुआ है कि मस्ताना न केवल पेपर लीक की प्रक्रिया में शामिल थे, बल्कि वह डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने और अभ्यर्थियों को गुमराह करने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे.
मोबाइल से मिले 14 प्रश्न और उनके उत्तर
CID की तकनीकी टीम ने जब संतोष मस्ताना के मोबाइल की जांच की तो उसमें परीक्षा से संबंधित 14 महत्वपूर्ण प्रश्नों और उनके उत्तरों के स्क्रीनशॉट बरामद हुए. ये स्क्रीनशॉट परीक्षा के समय से पहले के बताए जा रहे हैं. इन साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि पेपर लीक के तार सचिवालय के भीतर तक फैले हुए थे. मोबाइल से कई डिलीट किए गए डेटा को भी रिकवर करने की कोशिश की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि यह जानकारी किन-किन लोगों को फॉरवर्ड की गई थी.
वीडियो लिंक बने केस डायरी का हिस्सा
संतोष मस्ताना पर केवल पेपर लीक का ही नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों को भड़काने का भी गंभीर आरोप है. जांच में पाया गया कि संतोष मस्ताना विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से परीक्षार्थियों को सरकार और चयन आयोग के खिलाफ उकसा रहे थे. उसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में व्यवधान डालना और मामले को भटकाना था. CID ने इन्हीं सबूतों के आधार पर संतोष मस्ताना को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. संतोष मस्ताना के ऊपर जिन सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर अभ्यर्थियों को भड़काने का आरोप लगाया गया है उन वीडियो के लिंक को जांच अधिकारी ने केस डायरी का हिस्सा बनाया है.
