चतरा: सिविल कोर्ट ने 16 साल पुराने एक बहुचर्चित मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए छात्र संगठन एबीवीपी के पूर्व प्रदेश मंत्री और प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता समेत सभी 13 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया है. अदालत के इस फैसले ने न केवल सालों से चल रहे कानूनी विवाद पर विराम लगाया, बल्कि जनहित के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी बढ़ाया है.

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क्या था पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2010 का है. शहर में एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक मासूम बच्चे की मौत हो गई थी, जिसके बाद स्थानीय निवासियों और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा था. आक्रोशित लोगों ने शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने और बाईपास निर्माण की मांग को लेकर NH-99 को जाम कर दिया था. पुलिस ने इस विरोध प्रदर्शन को गैर-कानूनी बताते हुए राजेश साह और अन्य 12 कार्यकर्ताओं के खिलाफ सदर थाना कांड संख्या 82/2010 दर्ज किया था.
16 वर्षों का लंबा इंतजार और कानूनी प्रक्रिया
यह मामला करीब 16 वर्षों तक चतरा न्यायालय में विचाराधीन रहा. इस दौरान दर्जनों गवाहों के बयान दर्ज किए गए. पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों का परीक्षण हुआ. बचाव पक्ष ने दलील दी कि यह आंदोलन पूरी तरह जनहित में था और किसी भी तरह की हिंसा का इरादा नहीं था.अदालत ने माना कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं, जिसके आधार पर सभी को दोषमुक्त घोषित कर दिया गया.
