Kolkata: मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की 294 सीटों के लिए तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. इसके साथ ही राज्य में चुनावी मुकाबले की तस्वीर साफ होने लगी है. ममता बनर्जी ने कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास से उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की और कहा कि पार्टी इस बार भी जीत की परंपरा को बनाए रखने के लिए पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतरेगी. ममता बनर्जी ने उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी ने इस बार अनुभव और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है. सूची में कई मौजूदा विधायकों को फिर से मौका दिया गया है, जबकि कुछ सीटों पर नए चेहरों को उतारा गया है. खास बात यह है कि इस बार भी भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी खुद चुनाव लड़ेंगी, जहां उनका मुकाबला भाजपा के नेता शुभेंदु अधिकारी से होना तय है.

भवानीपुर में ममता-शुभेंद के बीच लड़ाई
पिछले विधानभसभा चुनाव में ममता बनर्जी दो सीटों से चुनावी मैदान में उतरी थीं. एक नंदीग्राम और दूसरी भवानीपुर विधानसभा सीट से. नंदीग्राम में ममता का मुकाबला भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से था. यहां वो शुभेंदु से चुनाव हार गईं थीं. हालांकि भवानीपुर से उन्होंने जीत हासिल की थी. इस बार यहां मुकाबला अहम है. क्योंकि भाजपा ने इस बार नंदीग्राम के साथ भवानीपुर से भी शुभेंदु अधिकारी को प्रत्याशी बनाया है.
पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे कुनाल घोष
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार सूची में कई अहम बदलाव देखने को मिले हैं. पार्टी ने इस बार कुछ पुराने चेहरों को टिकट नहीं दिया है, जबकि कई नए नामों को मौका मिला है. पूर्व क्रिकेटर और मंत्री मनोज तिवारी को इस बार पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बनाया है. पार्टी ने इस बार कनई मंडल को भी टिकट नहीं दिया है. वहीं, टीएमसी ने मदन मित्रा को फिर उम्मीदवार बनाया है, लेकिन उनका निर्वाचन क्षेत्र बदल दिया गया है. तृणमूल के प्रवक्ता कुनाल घोष को बेलघाटा सीट से टिकट दिया गया है और वह पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे.
135 विधायकों को फिर से मौका, 74 का कटा टिकट
टीएमसी ने उम्मीदवारों की सूची जारी करते हुए कई सीटों पर बड़ा बदलाव किया है. 224 मौजूदा विधायकों में से पार्टी ने 135 को फिर से मौका दिया है, जो करीब 60 प्रतिशत है. वहीं 15 विधायकों को दूसरी सीटों पर भेजा गया है और 74 विधायकों के टिकट काट दिए गए हैं. इसे पार्टी नेतृत्व की रणनीति माना जा रहा है, जिसके जरिए स्थानीय एंटी-इनकंबेंसी को कम करते हुए संगठन की ताकत बनाए रखने की कोशिश की गई है. इस सूची में कुछ बड़े नेताओं को टिकट नहीं दिया गया है. बरासात के विधायक चिरंजीत चक्रवर्ती, बेहाला वेस्ट के विधायक पार्थ चटर्जी और बेलियाघाटा के विधायक परेश पाल को इस बार पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बनाया है. इससे साफ है कि पार्टी कई सीटों पर नए समीकरण बनाने की कोशिश कर रही है.
टीएमसी ने कुछ युवा चेहरों को मैदान में उतारा
टीएमसी ने इस बार कुछ युवा चेहरों को भी चुनावी मैदान में उतारा है. मणिकतला सीट से श्रेया पांडे को टिकट दिया गया है. वहीं टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के बेटे सिरसान बनर्जी को उत्तरपाड़ा से उम्मीदवार बनाया गया है. इससे यह भी माना जा रहा है कि पार्टी युवा नेतृत्व को भी आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है.
पार्टी ने महिलाओं और आरक्षित वर्गों पर जताया भरोसा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची में महिलाओं और आरक्षित वर्गों को अहम जगह दी है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि टीएमसी ने 52 महिलाओं को टिकट दिया है. उन्होंने कहा कि राज्य में 84 सीटें एससी-एसटी के लिए आरक्षित हैं, लेकिन पार्टी ने 95 उम्मीदवार उतारे हैं. इनमें 78 एससी और 17 एसटी वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं.
चुनाव आयोग भाजपा के पक्ष में अच्छा खेल रहा : ममता
इस दौरान ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भाजपा के पक्ष में अच्छा खेल रहा है. ममता ने कहा कि अगर आयोग भाजपा की मदद ही कर रहा है तो उसे सीधे भाजपा के लिए चुनाव प्रचार करना चाहिए.

