शगूफा बनकर रह न जाए बोकारो से उड़ान, छर्रा एयरपोर्ट के लिए ने उड़ाई बोकारो के लोगों की नींद

Bokaro: बोकारो एयरपोर्ट से व्यवसायिक उड़ान एक राजनीतिक मुद्दा बनकर रह गया है. 2018 से 2026 के बीच कई बार उड़ान शुरू...

Bokaro: बोकारो एयरपोर्ट से व्यवसायिक उड़ान एक राजनीतिक मुद्दा बनकर रह गया है. 2018 से 2026 के बीच कई बार उड़ान शुरू होने की उम्मीद जगी और टूटी भी, लेकिन अब तक बोकारोवासियों के सपनों की उड़ान धरातल पर नहीं उतर सकी है. इस बीच राज्य में सत्ता परिवर्तन भी हुआ, लेकिन एयरपोर्ट से उड़ान शुरू करने की दिशा में ठोस प्रगति नहीं हो पाई. तकनीकी पहलुओं की बात करें तो अभी भी कई आवश्यक तैयारियां अधूरी हैं. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और बीएसएल के बीच कई मुद्दे अब तक सुलझ नहीं सके हैं. जानकारों का मानना है कि सबसे बड़ी बाधा राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है, जिसके कारण बोकारो एयरपोर्ट का भविष्य अब भी संशय में बना हुआ है.

छर्रा एयरपोर्ट बन सकता है बड़ा विकल्प

बोकारो के जानकार लोगों का कहना है कि पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले स्थित छर्रा एयरपोर्ट के विकास कार्य में तेजी आने की संभावना है. बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी सरकार के समय से ही इस एयरपोर्ट के विकास की योजना पर काम शुरू हो चुका था. अब पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने की संभावनाओं के बीच केंद्र सरकार का विशेष ध्यान भी छर्रा एयरपोर्ट की ओर जा सकता है. ऐसे में बोकारो एयरपोर्ट के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ने लगी है. हालांकि अभी तक छर्रा एयरपोर्ट पर सर्वे के अलावा जमीनी स्तर पर कोई बड़ा कार्य शुरू नहीं हुआ है, जबकि बोकारो एयरपोर्ट लगभग उड़ान के लिए तैयार स्थिति में बताया जा रहा है.

रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा छर्रा एयरपोर्ट

जानकारों के अनुसार पुरुलिया जिले से जमशेदपुर की दूरी करीब 80 किलोमीटर, धनबाद 60 किलोमीटर, बोकारो 50 किलोमीटर, बांकुड़ा 86 किलोमीटर और रांची लगभग 130 किलोमीटर है. इसके अलावा बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए भी छर्रा एयरपोर्ट को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले एक-दो वर्षों में बोकारो एयरपोर्ट से उड़ान सेवा शुरू नहीं हुई, तो यह परियोजना लंबे समय तक अधर में लटक सकती है.

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द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ा है छर्रा एयरपोर्ट का इतिहास

जानकारी के अनुसार 1942-43 में ब्रिटिश सरकार द्वारा छर्रा एयरस्ट्रिप का निर्माण कराया गया था. कहा जाता है कि हिरोशिमा में बम गिराने के बाद विमान को यहां उतारा गया था. इसके बाद यह एयरस्ट्रिप लंबे समय तक उपेक्षित रही. हाल के वर्षों में इस एयरपोर्ट के विकास को लेकर चर्चा फिर तेज हुई है. वर्ष 2025 और 2026 में संसद में भी छर्रा एयरपोर्ट के निर्माण और विकास को लेकर सवाल उठाए गए थे.

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