Ranchi: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि तीन साल के अंतराल के बाद संस्थान का दौरा करना उनके लिए खुशी की बात है. झारखंड के पूर्व राज्यपाल के रूप में अपने जुड़ाव को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस संस्थान की प्रगति को बड़ी दिलचस्पी से देखते रहे हैं और इस दौरान आईआईएम रांची द्वारा हासिल की गई प्रगति वास्तव में उल्लेखनीय रही है. वे शनिवार को आइआइएम रांची के 15 वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे. उन्होंने सामाजिक रूप से उत्तरदायी शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रबंधन शिक्षा को बोर्डरूम और बैलेंस शीट से परे जाना चाहिए एवं समाज के साथ जुड़ना चाहिए, वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का समाधान करना चाहिए और समावेशी विकास में योगदान देना चाहिए.

ये भी पढ़ें : JAC TET 2026: आवेदन शुरू, 21 अप्रैल से 21 मई तक करें ऑनलाइन अप्लाई
“अकादमिक केस स्टडी विश्लेषणात्मक कौशल का परीक्षण करती है”
उपराष्ट्रपति ने कहा कि अकादमिक केस स्टडी विश्लेषणात्मक कौशल का परीक्षण करती हैं, जबकि जीवन में ऐसे निर्णय लेने पड़ते हैं जो लोगों की आजीविका, विश्वास और व्यापक सामाजिक हित को प्रभावित करते हैं. उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे सफलता को केवल उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उन मूल्यों और नैतिकता से परिभाषित करें जिनका अनुसरण करते हुए उपलब्धियां हासिल हुईं. नैतिक नेतृत्व, ईमानदारी और विश्वास ही स्थायी संस्थानों की नींव हैं. उन्होंने छात्रों को शॉर्टकट की बजाय चरित्र और लाभ की बजाय उद्देश्य को चुनने के लिए प्रोत्साहित किया.
ये भी पढ़ें : पाकुड़ पुलिस ने की बड़ी कार्रवाई, हत्या मामले में 4 आरोपी को किया गिरफ्तार
कार्यों का प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखे : सीपी राधाकृष्णन
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने युवाओं से 2047 में विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण में योगदान देने का आह्वान करते हुए उनसे “वैश्विक स्तर पर सोचने, स्थानीय स्तर पर कार्य करने” और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि उनके कार्यों का प्रभाव जमीनी स्तर पर दिखे. स्नातक छात्रों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए उन्हें सफलता, पूर्णता और उद्देश्यपूर्ण जीवन की शुभकामनाएं दीं, साथ ही उनसे आग्रह किया कि वे हमेशा याद रखें कि सफलता का सच्चा मापदंड इस बात में नहीं है कि कोई क्या अर्जित करता है, बल्कि इस बात में है कि कोई समाज को क्या देता है.
