रांची: झारखंड के प्रशासनिक गलियारों में मंगलवार को भारी गहमागहमी है. वित्तीय वर्ष 2025-26 का आज आखिरी दिन होने के कारण सभी सरकारी विभागों में बिल क्लियर करने और बजट राशि का उपयोग करने की होड़ मची हुई है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार ने इस वर्ष के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित किया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है.
आर्थिक मामलों के जानकार क्या कहते हैं
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड जैसे राज्य के लिए बजट का 85-90 प्रतिशत खर्च करना एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. हालांकि, स्वास्थ्य और जल संसाधन जैसे विभागों में कुछ बुनियादी ढांचे के कार्यों में देरी के कारण कुछ राशि वापसी (सरेंडर) हो सकती है. झारखंड सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में ‘समावेशी विकास’ पर जोर दिया है. अगले वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिए सरकार ने पहले ही 1.58 लाख करोड़ का बजट घोषित किया है, जिसका प्रभावी क्रियान्वयन आज की क्लोजिंग रिपोर्ट पर निर्भर करेगा.
क्यों अहम है आज का दिन
सरकारी नियमों के अनुसार, यदि आवंटित बजट राशि आज रात 12 बजे तक खर्च नहीं होती या संबंधित ट्रेजरी में सरेंडर नहीं होती, तो वह राशि समाप्त हो जाती है. इसी कारण राज्य की सभी ट्रेजरी में ठेकेदारों के भुगतान और विकास कार्यों के बिलों का अंबार लगा हुआ है.
पिछले वर्षों की तुलना में इस बार सरकार ने पूंजीगत व्यय में 18 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य रखा था, जिसे हासिल करना एक बड़ी चुनौती है.
प्रमुख विभागों का प्रदर्शन
ग्रामीण विकास: मनरेगा और अन्य ग्रामीण योजनाओं के तहत इस वर्ष 3,190 करोड़ रुपये से अधिक की राशि केवल रोजगार सृजन पर खर्च की गई.
शिक्षा और स्वास्थ्य: प्रारंभिक और तकनीकी शिक्षा के लिए आवंटित 18,000 करोड़ रुपये में से बड़ा हिस्सा शिक्षकों के वेतन और स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर खर्च हुआ.
मईंया सम्मान योजना: महिला बाल कल्याण विभाग ने इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत आवंटित 1,465 करोड़ का लगभग 100 प्रतिशत लाभुकों तक पहुँचाया.
अब तक प्रमुख विभागों का खर्च
कृषि विभाग: बजट 1,963.44 करोड़ रुपये, खर्च 1,212.10 करोड़ रुपये.
पशुपालन विभाग: बजट 580.23 करोड़ रुपये, खर्च 305.80 करोड़ रुपये.
भवन विभाग: बजट 676.61 करोड़ रुपये, खर्च 564.85 करोड़ रुपये.
ऊर्जा विभाग: बजट 10,480.47 करोड़ रुपये, खर्च 9,199.37 करोड़ रुपये.
उत्पाद विभाग: बजट 69.12 करोड़ रुपये, खर्च 46.01 करोड़ रुपये.
खाद्य आपूर्ति विभाग: बजट 1,886.14 करोड़ रुपये, खर्च 1,637.48 करोड़ रुपये.
वन विभाग: बजट 1,990.42 करोड़ रुपये, खर्च 1,806.67 करोड़ रुपये.
स्वास्थ्य विभाग: बजट 5,437.25 करोड़ रुपये, खर्च 4,524.47 करोड़ रुपये.
उच्च शिक्षा विभाग: बजट 1,732.27 करोड़ रुपये, खर्च 1,295.76 करोड़ रुपये.
गृह विभाग: बजट 8,535.44 करोड़ रुपये, खर्च 7,956.54 करोड़ रुपये.
उद्योग विभाग: बजट 463.99 करोड़ रुपये, खर्च 293.83 करोड़ रुपये.
श्रम विभाग: बजट 1,993.17 करोड़ रुपये, खर्च 956.97 करोड़ रुपये.
खान विभाग: बजट 364.64 करोड़ रुपये, खर्च 118.81 करोड़ रुपये.
पेयजल विभाग: बजट 3,841.66 करोड़ रुपये, खर्च 1,667.36 करोड़ रुपये.
भूमि राजस्व विभाग: बजट 856.61 करोड़ रुपये, खर्च 678.13 करोड़ रुपये.
पथ निर्माण विभाग: बजट 5,221.38 करोड़ रुपये, खर्च 4,487.40 करोड़ रुपये.
ग्रामीण विकास विभाग: बजट 6,641.86 करोड़ रुपये, खर्च 3,685.40 करोड़ रुपये.
पर्यटन विभाग: बजट 180.39 करोड़ रुपये, खर्च 110.37 करोड़ रुपये.
परिवहन विभाग: बजट 162.03 करोड़ रुपये, खर्च 44.60 करोड़ रुपये.
जल संसाधन विभाग: बजट 1,937.19 करोड़ रुपये, खर्च 1,892.66 करोड़ रुपये.
ग्रामीण कार्य विभाग: बजट 5,772.72 करोड़ रुपये, खर्च 5,265.04 करोड़ रुपये.
पंचायती राज विभाग: बजट 1,427.45 करोड़ रुपये, खर्च 547.27 करोड़ रुपये.
स्कूली शिक्षा विभाग: बजट 8,641.04 करोड़ रुपये, खर्च 6,262.25 करोड़ रुपये.
महिला बाल विकास विभाग: बजट 22,138.90 करोड़ रुपये, खर्च 19,913.77 करोड़ रुपये.
