रांची: झारखंड की राजनीति में इन दिनों रामगढ़ का गोला कांड और उसके बाद की गिरफ्तारियां चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं. डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के अध्यक्ष जयराम महतो ने पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया है, वहीं झारखंड पुलिस एसोसिएशन के संयुक्त सचिव राकेश पाण्डेय ने भी इन आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताई है.

क्या है पूरा मामला:
मामले की जड़ 4 अक्टूबर 2024 की वह घटना है, जब गोला थाना क्षेत्र में पुलिस की पीसीआर वैन की चपेट में आने से दो आदिवासी युवकों, अजीत हेम्ब्रम और सागर हेम्ब्रम की मौत हो गई थी. इस घटना ने पूरे इलाके को आक्रोशित कर दिया था. स्थानीय लोगों और JLKM कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह महज दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही का नतीजा थी. इसी के विरोध में हुए प्रदर्शनों और थाना घेराव को लेकर पुलिस ने मामला दर्ज किया था.विधायक जयराम महतो ने अपने कार्यकर्ताओं के जेल जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.जयराम महतो का कहना है कि आंदोलन में कई दलों के लोग शामिल थे, लेकिन पुलिस ने केवल जेएलकेएम पदाधिकारियों (संतोष महतो, देवानंद महतो, शिव नंदन मुंडा और शहबाज़ अनवर गोल्डी) को टारगेट कर प्राथमिकी दर्ज की. उन्होंने आरोप लगाया कि रामगढ़ में पुलिस नरपिशाच’ की तरह व्यवहार कर रही है. विधायक ने आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है. उन्होंने चेतावनी दी कि निर्दोषों को जेल भेजने का जवाब जनता आने वाले समय में जरूर मांगेगी.

पुलिस एसोसिएशन का करारा जवाब:
जयराम महतो के बयानों पर पलटवार करते हुए झारखंड पुलिस एसोसिएशन के संयुक्त राकेश पांडेय ने अपनी बात रखी. उन्होंने पुलिस बल का बचाव करते हुए कहा, यदि पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी कर रहे हैं और सुरक्षा में लगे हैं, तो वे ‘नरपिशाच’ कैसे हो गए? सरकारी कार्य में बाधा डालना और उपद्रव कर कानून-व्यवस्था को बिगाड़ना क्या क्रांतिकारी समाजसेवा है? नेताओं को पुलिसकर्मियों की मर्यादा का ख्याल रखना चाहिए.

